मैथिलीक संग बिहार सरकारक इ केहन न्याय ?

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    मधुबनी,मिथिला मिरर-सुजीत कुमार ठाकुरः मिथिला, साक्षरता में बिहार सं बहुत पाछु अछि। बिहार सरकार अहिक लेल किछु ने किछु निश्चित रूपहि जिम्मेदार अछि। राज्य सरकार कें चाहि कि राज्यक अंतर्गत आबैवला मिथिला क्षेत्र में साक्षरताक प्रतिशत बढ़ेवाक लेल प्रारंभिक शिक्षा ओकर मातृभाषा अर्थात मैथिली में दियवैथ। अल्बर्ट, आइंस्टाईन सं लय विश्व सब नामचीन प्रतिभाक व्यक्तित्व सब मातृभाषाक पक्षधर छलथि। चाहे विलियम सेक्सपेयर, चाणक्य, आर्यभट्ट, वराह मिहिर, रविंद्रनाथ ठाकुर, विद्यापति, कालीदास, न्यूटन, अरस्तू, प्लूटो, लेनिन सं लय समस्त विभूतिक जौं इतिहास उलटा जौं देखल जाय त अहि बातक प्रणाम साफ-साफ भेटैत अछि कि इ सब मात्र अपन मातृभाषाक बदौलत विश्व पटल पर अपन पहिचान बनेवा में सफल रहला। बिहार में मैथिली एकटा प्रमुख भाषा अछि तखन फेर बिहार सरकार उर्दू, बांग्लाक शिक्षकक नियुक्ति कय रहल अछि मुदा मैथिलीक शिक्षकक खोजो खबरि लेवा में बिहारक मुख्यमंत्री दिलचस्पि नहि देखा रहला अछि।
    एखन धरि मैथिली बिहारक द्वितीय भाषा नहि बनि सकल अछि। 1980 में जखन बिहारक तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र जखन उर्दू कें बिहारक द्वितीय भाषाक दर्जा देलनि त इ प्रश्न उठल छल जे मैथिली कें उपेक्षा कियैक ? ताहि पर मिश्रा जीक कहब रहनि जे चूकि मैथिली एखन संवैधानिक भाषा नहि थिक आ उर्दू कें संविधानक आठम अनुसूचि में जगह भेट चुकल अहि ताहि हेतु उर्दू कें द्वितीय भाषाक दर्जा देल जा रहल अछि। मुदा मैथिली कें संविधानक आठम अनुसूचि में शामिल भेला आब दस बरख सं बेसी भय चुकल अछि तेकरा बादो बिहार सरकार मैथिली भाषाक प्रति कुंभकरणी निंद में सुतल सन बुझना जा रहल अछि।
    बिहार सरकार गया आ मोतीहारी में केंद्रीय विश्वविद्यालयक लौलीपाॅप दय अपन वोट बैंक सुरक्षित करवाक पूरजोर कोशिश केलक जेकरा भारत सरकारक हरियर झंडी सेहो भेट गेल मुदा मिथिलाक एतेक पैध आबादी रहितो एखन धरि सरकार उपेक्षा पूर्ण नीति अपना रहल अछि। एकरा मिथिलाक संग भेदभाव नहि त आओर कि कहल जाय ? शिक्षाक नाम पर हजारो-करोड़ों टकाक खर्च भय रहल अछि एहिक बावजूद बिहार में प्राथमिक शिक्षाक स्थिति निरंतर बैतरनी करा अपन अंतिम सांसक बाट जोहि रहल अछि। सरकारक लक्ष्य वीहिन नीतिक कारण बच्चा सबहक भविष्य पर कारिख पोता रहल अछि मुदा बिहार सरकारक मुखिया हर मंच पर जा बिहारक शिक्षा आ सकल घरेलू उत्पादकें गनेवा दिस काज कय रहला अछि।
    आब ओ समय नहि रहल जे स्कूल मे शिक्षक आ विद्यार्थी दुनू स्कूल जा पठन आ पाठन मे एक-दोसरक प्रति जवाबदेह रहैत छलथि आब त शिक्षक लोकनिक समय खिचैरक चाउर, दालि कें दामक लेखा जोखा करवा में चलि जाइत अछि। जौं मास्टर साहेब लोकनि कें समय भेटतो छनि त ओ अपन बहुमुल्य समय कें सरकारक आदेश मानी महिष आ बकरीक जंनसंख्या गनवा में लगा दैत छथि। आखिर मे मुख्यमंत्री नीतिक जे फायदा बिहारक शिक्षा व्यवस्था मे हैत ओ त बादक बात अहि मुदा मैथिली प्रति बिहारक मुख्यमंत्रीक उपेक्षा जगजीयार भय रहल अछि।