रक्षा बंधन पर शिव कुमार झा टिल्लू द्वारा रचित इ सुंदर सन रचना

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    पवित्र प्रेमक स्नात
    अहँक अरुदाक बात
    नहि बिसरब औ बहिना के !
    भ्रातृधर्मक अहिवात
    रहत खहखह तन गात
    करब रक्षा औ बहिना के……
    राति पूनम दिन चकचक दिनमान छै
    अहँक विजयक पथ भकभक जहान छै
    ने कोनो अर्थक उपहार
    आत्म श्रद्धा त्योहार
    हिय राखब औ बहिना के ……..
    जतेक बरखा अकाससँ झड़ै अछि
    ओतबे भैयाके’ कीर्ति बढ़ै अछि
    राखब मान माय- तात
    करब किनको ने कात
    जोगि धरबै यौ मयना के ….
    तिलक कुमकुम संग सूतकेँ निहारू
    सभ वरख भेँटब हियसँ सकारू
    कोशी कमलाके धार
    पुरुखाके विचार
    नहि छोड़ब औ वयना के….