खंडहरमे बदलि रहल बुलंद इतिहास, देखनिहार कियो नहि

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    दरभंगा, मिथिला मिरर: कहियो पढ़बाक लेल उपयुक्त स्थान छल, मुदा आए खंडहरमे तब्दील भए बुलंद अतीतकें महज याद करबाक लेल विवश अछि सूर्यदेव नारायण स्मारक पुस्तकालय। पतोर गाममे पुस्तकालयकें आब याद मात्र बचल अछि। एतयकें चहलकदमी पर जेना ककरो नजरि लागि गेल हो।

    ग्रामीण सूर्यदेव नारायण मिश्र उक्त पुस्तकालयके लेल चारि कट्ठा सात धूर जमीन मुहैया करौने छलाह। 1962मे एकर नींव बिहार सरकारके तत्कालीन राजस्व मंत्री रहल गामक जानकीरमण मिश्रके अथक प्रयास सं बिहारके प्रथम मुख्यमंत्री कृष्ण सिंह रखने छलाह। ओहि गामक दू बेर विधान पार्षद रहल व सीएम कॉलेजके प्राचार्य प्रो.जगन्नाथ मिश्र उक्त पुस्तकालयके संस्थापकक तौर पर अप्पन भूमिका निमाहला।

    पुस्तकालयके सुचारू करबाक लेल तत्कालीन अध्यक्ष स्वतंत्रता सेनानी रघुनाथ मिश्रक सेहो अहम भूमिका छलनि। अहि प्रकार इतिहासकें समेटय वला अहि पुस्तकालयकें देखब कियो मुनासिब नहि बुझैत अछि। लगभग तीन दशक पहिने बिहार सरकारके तत्कालीन शिक्षा राज्यमंत्री कफील अहमद कैफी उक्त पुस्तकालयके भवनक जीर्णोद्धारक लेल अपन ऐच्छिक कोष सं राशि मुहैया करौने छलाह। मुदा किछु नहि भए सकल।

    एतय 10 साल पहिने धरि किताबक वजूद जिबैत छल, आइयो एतय 15 टा आलमीरामे 4200 दुर्लभ पुस्तक राखल अछि।