मैथिली-भोजपुरी अकादमी दिल्ली, राजनीति ओ चापलूसीक अड्डा

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    दिल्ली-मिथिला मिररः दिल्लीक तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षीत द्वारा देशक राजधानी दिल्ली मे मैथिली ओ भोजपुरी भाषा एवं लोक कलाक संवर्धनक उदेश्य सं गठन कैल गेल मैथिली-भोजपुरी अकादमी दिल्ली, गठनक बादे सं विवाद मे रहय लागल। जाहि उदेश्य सं मैथिली-भोजपुरी अकादमीक गठन दिल्ली मे कैल गेलैक ओहि उदेश्य कें छोडि़ अकादमी सब तरहक काज कें संपन्न करबा मे बेसी रूची देखौलक बनिस्पद कि अपन उदेश्य पूरा करवाक दिस।

    गठनक बादे सं अहि तरहक प्रश्न चिन्ह मै-भो अकादमी पर लागय लागल जे दिल्ली सरकार ओहि व्यक्ति कें अकादमीक कार्यकारिणी मे शामिल करैत अछि जे व्यक्ति ओहि पार्टी सं कोनो ने कोनो रूपे ओहि पार्टी ओ सरकार सं जुड़ल हो। जेना-तेना अकादमी शपथ खेबाक लेल सलाना किछु ने किछु काज सेहो करैत रहल मुदा ओ सब दिने राजनीति ओ चापलूसीक दंश झेलवाक लेल विवश रहबेटा कैल।
    हर बेर नव कार्यकारिणीक गठनक बाद एकटा नव प्रश्न चिन्ह लगैत गेलै जे आखिर कोन कारण छैक जे मिथिला, मैथिली मे जे काज केनिहार व्यक्ति छथि, जे खांटी रूपे मिथिला, मैथिलीक लेल समर्पित छैथ हुनका ओहि अकादमी मे जगह नहि द एहन-एहन व्यक्ति कें नव चेहरा बना अकादमी मे आनल जाइत अछि जिनकर मिथिला ओ मैथिली मे नहि त कोनो पहिचान छन्हि आ नहि हुनकर काज सं मैथिल समाज कोनो रूपे परिचित छैथ।
    बाद मे एहनो तरहक प्रश्न उठय लागल जे अकादमी मे मैथिली ओ भोजपुरी दुनू भाषा मे भेदभाव सेहो कैल जाय लागल अछि। सलाना जे कार्यक्रम मैथिली-भोजपुरी अकादमी द्वारा कराओल जाय छल ओहि पर सेहो प्रश्न चिन्ह उठय लागल छल। मिथिला मिरर’क संपादक सं कतेको बेर मैलोरंग रेपर्टरीक संस्थापक आ निर्देशक प्रकाश झा अहि संदर्भ मे बात कय अपन बात रखलाह जे संस्था द्वारा एके तरहक कार्यक्रमक लेल अलग-अलग राशिक निर्धारण कैल जाय रहल अछि।
    बाद मे मिथिला मिररक संपादक मैथिली-भोजपुरी अकादमीक तत्कालीन उपाध्यक्ष अजीत दूबे सं बात कय प्रमुखता सं संस्था लग अहि बातक विरोध जतेने छलाह। संस्था सेहो अहि पर अपन गलती मानैत आगु सं अहि तरहक गलती नहि हेवाका आश्वासन देने छल। बाद मे संस्था द्वारा किछु एहन काज कैल गेल जे निश्चित रूपहिं संस्थाक कार्य करवाक ढंग पर प्रश्न चिन्ह लगौलक। संस्था द्वारा कैल गेल कार्यक्रम मे एहन व्यक्तिकें साहित्यकार रूप मे बजाओल गेल जे निंदनीय छल।
    उक्त व्यक्तिक कार्यक जौं मुल्यांकन करी त मैथिली साहित्य मे हुनकर कोनो योगदान नहि छन्हि आ नहि हुनका साहित्यक सृजनकर्ताक रूप मे मैथिल समाज कहियो चिनहलक। जौं संस्था बिना काज केनिहार व्यक्ति कें मैथिलीक वरिष्ठ साहित्यकारक रूप मे आमंत्रित करय आ ओ व्यक्ति बिना कोनो काज केने अपना आप कें मंच पर मैथिलीक वरिष्ठ साहित्कारक रूप मे अपना आपकें मंच पर प्रस्तुत केलक त एकरा मिथिला मिरर निर्लजताक पराकाष्ठा कहैत अछि।
    बाद मे दिल्ली मे आम आदमी पार्टीक सरकार बनल आ नव कार्यकारिणीक गठन भेलैक मुदा ओहोठाम स्थिति ओहने छल जेहन पूर्ववर्ती सरकार मे देखल गेल छल। नव कार्यकारिणी मे मैथिली दिस सं एहन-एहन व्यक्तिकें संस्था मे जगह भेटल जे नाम अपना आप मे एकटा आश्चर्य सं कम नहि छल। अहि संदर्भ मे मिथिला मिरर दिल्ली मे आम आदमी पार्टीक पूर्वांचल मोर्चाक अध्यक्ष नीरज पाठक सं बात केने छल आ नीरज कहने छलाह जे मुख्यमंत्री सं हमरा समय भेटल अछि आ अहि विषय पर हम विस्तार सं बात मिथिला मिरर कें स्थिति सं अवगत करायब। मुदा ओहो ठाम सं मिथिला मिरर कें कोनो प्रतिउत्तर नहि भेटल।
    बादमे मिथिला राज्य निमार्ण सेनाक दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष संजय झा ‘नागदह’ जखन दिल्ली सरकारक संबंधित मंत्री सं बात केलाह त हुनकर जे जवाब छल ओ बहुत बेसी कष्ठप्रद आ अहंकार सं भड़ल जवाब छल। खैर बात किछु आगु बढ़लै आ दिल्ली सरकार द्वारा मैथिली-भोजपुरी अकादमीक मादे पहिल बेर ‘बिहार सम्मान’क आयोजन केने छल आ मैथिली-भोजपुरी जगतक किछु नामचीन व्यक्ति कें बिहार सम्मान सं सम्मानित केलक। मंच पर दिल्लीक मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ओ बिहारक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दुनू छलाह। निर्विवाद छल जे मंच समाजिक सं राजनीतिक भय गेल छल।
    मिथिला मिरर अहि बातक पूरजोर खंडन करैत अछि जे मैथिली-भोजपुरी अकादमी कें राजनीति ओ चापलूसीक अड्डा बनाओल जाय। जौं अहि तरहक गड़बड़ी होइत रहत त मिथिला मिरर अहि बातक पूरजोर विरोध करैत रहत आ बेर-बेर संस्थाक क्रियाकलाप पर नजैर सेहो बनौने रहत।