स्वाधीनता दिवसक उपलक्ष्यमे मणिकांत झा द्वारा लिखल सुंदर सन कविता

    0
    530

    पन्द्रह अगस्त के सौंसे अनघोल छै
    फहरइ तिरंगा गली नगर टोल छै ।
    गाँधी सुभाष संग लड़लनि अनेक
    शांति संग क्रांति के बढ़ल छल डेग
    चंद्रशेखर भगत सिंह फाँसी चढ़ि गेल छै
    फहरइ तिरंगा गली नगर टोल छै ।
    आजादीक आइ सत्तरिम साले
    खुशहाली आयल देशो नेहाले
    बिस्मिल आ मंगल के आहूति देल छै
    फहरइ तिरंगा गली नगर टोल छै ।
    सब क्यो मिलि जुलि हिंद के बढ़ाबू
    राष्ट्रक निर्माण मे आगाँ बढ़ि आबू
    विश्व के पटल पर भारत अनमोल छै
    फहरइ तिरंगा गली नगर टोल छै ।
    आपस मेल करू जाति धर्म छोड़ि कय
    राग द्वेश राखू ने मन अहाँ गोड़ि कय
    मणिकांत जीवन मे एकताक मोल छै
    फहरइ तिरंगा गली नगर टोल छै ।।
    मणिकांत झा, दरभंगा
    स्वाधीनता दिवस
    २०१६ ईस्वी ।