अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर ‘मायक आँचर’ पर लिखल हमर गीत

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    आब बिसरब कोना सुनू जननी अहाँ
    कतेक निर्मल सेहंतित अहँक ऑचर
    हिय सिहकै जखन बहै लोचन तखन
    नोर पोछलहुँ लपेटि हम अहँक ऑचर
    कोना अयलहुँ खलक ? मोन नहि अछि कथा,
    पवित्र पटसँ सटल देह भागल व्यथा
    सिनेह निश्छल अनमोल पहिल सुनल मायबोल
    मोह ममताक आन के‘ करत परतर
    दांत दूधक उगल, पानि पेटसँ बहल
    देह लुत्ती भरल कंठ सरिता सुखल
    जी करै छल बिसबिस तालु अतुल टिसटिस
    मुॅहमे लऽ चिबेलहुँ अहँक ऑचर
    नेना वयसक अवसान ताक‘ चललहुँ हम ज्ञान,
    कएलहुँ गणना अशुद्ध गुरू फोड़ि देलनि कान
    सिलेट बाटपर पटकि मायक कोरमे सटकि,
    तीतल कमलाक धारसँ अहँक ऑचर
    देखि पॉचमक फल मातृदीक्षा सफल,
    भाल तिरपित मुदा ! उर तृष्णा भरल
    गेलहुँ कत‘ हे अम्बे कत‘ गेल ऑचर
    ताकि रहलहुँ हम ऑगनसँ पिपरक तर !

    अहँक आँचर ( गीत ) शिव कुमार झा ‘टिल्लू’