अस्तित्वक संकटसँ जूझि रहल अछि मधुबनीक खादी भंडार

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मधुबनी, मिथिला मिरर :  खादी उत्पादनमे कहियो देश स्तर पर प्रसिद्ध मधुबनीक खादी भंडार आई बदहालीसँ जूझ रहल अछि। एकटा एहन समय छल जखन मधुबनीक खादी भंडार अपन बुलंदी पर छल। पूंजी आ उत्पादनक अभावमे भंडारक बिक्री केंद्र पर उपभोक्ता सभकेँ खादीक  कपड़ा उपलब्ध नै भ’ रहल अछि, जखन की खादिक कपड़ाक माँग ज्यादा अछि । हाल इ अछि जे करीब दू सालसँ उत्पादन ठप पड़ल अछि। वर्ष 1924 मे स्थापित खादी भंडारक बदहालीकेँ  आलम इ अछि जे एकर लगभग तीन सौ कामगारक संख्या घटि, आब 19 रहि गेल अछि। अवकाश प्राप्त कामगार सभक बकाया राशिक भुगतान विगत कतेकों सालसँ लंबित अछि। जिला मुख्यालय स्थित भंडारक कतेको भूखंडसँ भंडारकेँ हर महिना प्राप्त होमय वला राशिमे सँ कामगार सभकेँ कोनो तीज त्योहार पर नाममात्र राशि भुगतान कएल जायत अछि।

कतेको बेर एतय आबि चुकल छथि विनोबा

खादी भंडारमे खादीक अलावे फर्नीचर, साबुन, सरिसों तेल, मध आ मसाला सहित अन्य उद्योग लगभग एक दशकसँ बंद पडल अछि। भंडारक अधिकांश भवन जर्जर भ’ गेल अछि। एकर कतेकों भवन त’ पूरा ध्वस्त भ’ गेल अछि। भूदान आंदोलनक प्रणेता विनोबा भावे समय-समय पर एतय अबैत छलाह। एहि भंडारक तहत संचालित लोहा खादी भंडारमे तैयार खास तरहक कपड़ा देशक पैघ-पैघ राजनेता सभकेँ भेजल जाइत छल। शहरकेँ खादी प्रेमी लोक सभक कहब छनि जे खादीक विकाससँ एतय बेरोजगारी दूर कएल जा सकैत छैक।

बिहार सरकार पर 28 लाखक भुगतान लंबित

खादी ग्रामोद्योग संघक जिला मंत्री सरला देवी बतौलनी जे खादी ग्रामोद्योगकेँ पुनः जीवित करबाक दिशामे प्रयास जारी अछि। भंडारमे पछिला कतेको माससँ सूत उत्पादन बंद अछि। चरखाक उत्पादन नै भ’ पाबि रहल अछि। बिहार सरकार आ भारत सरकारकेँ आर्थिक सहयोगक बगैर एकर पुनरउत्थान संभव नै भ’ सकैछ। बिहार सरकार पर भाड़ाक मदमे करीब 28 लाख रुपैयाक भुगतान लंबित अछि। एतय काज करय वला कर्मि सभक वेतनक भुगतान भंडारक विभिन्न भवनसँ भेटय वला भाड़ासँ कएल जाइत अछि।

एहनमे निश्चित रुपें दुनू सरकारकेँ एहि मामलामे संज्ञान लेबाक चाही जाहिसँ खादी भंडार पुनः अपनाकेँ जीवित क’ सकै। एतबे नहि जं सहि तरीकासँ एकर सञ्चालन कएल जाय त’ कतेकोँ लोक सभक रोजीरोटी बड़ा सहज रुपें हुनका अपन जन्मभूमि पर उपलब्ध भ’ जेतनी आ हुनक लोकनिक जीवन शैलीमे सेहो व्यापक बदलाब देखबाक भेटत।

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