कोलकाता विश्वविद्यालयमे पुनः प्रारंभ होयत मैथिली भाषाक पढ़ौनी

    0
    195

    दिल्ली, मिथिलामिरर: कोलकाता विश्वविद्यालयमे मैथिली भाषाक पढ़ौनी पुनः प्रारंभ करबाक अनुशंसा राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी कयलनि अछि। विदित हो कि “मिथिला विकास परिषद” विगत् ०७ दिसम्बर, २०१६ कें अपन राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक झा नेतृत्वमे नौ सदस्यसीय प्रतिनिधिमंडल केर संग राजभवन स्थित राज्यपाल सँ भेंट कय कोलकाता विश्वविद्यालयमे मैथिलीके पुनः पढ़ौनी प्रारम्भ करबाक हेतु ज्ञापन देने छलाह।

    ज्ञापनमे एहि बातक स्पष्ट उल्लेख कयल गेल छल जे अति प्राचीन भाषाक रूपमे मैथिलीक विशिष्ट स्थान अछि जे सर्वविदित अछि। कोलकाता विश्वविद्यालय द्वारा अनेकों बरख पूर्व मैथिलीक पढ़ौनी होइत आबि रहल छल। परन्तु अत्यधिक वेदनाक संग कह पड़ि रहल अछि जे अति प्राचीन भाषा मैथिलीके सेहो राजनैतिक कुचक्रक प्रभाव ग्रसित कयलक। परिणामस्वरूप मैथिलीकें एक सुनियोजित षडयंत्र केर तहत् पाठ्यक्रम सँ हटा देल गेल।

    ज्ञातव्य हो कि अति प्राचीनतम भाषाके विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कयल गेल दुर्दशाक परिपेक्ष्यमे “मिथिला विकास परिषद” अनेकों बेर धरना-प्रदर्शन कय पुनः पढ़ौनी हेतु आन्दोलन करैत विश्वविद्यालयक ध्यान आकृष्ट करैत आबि रहल अछि। कोलकाता विश्वविद्यालयमे मैथिली पढ़ौनीक लेल तत्कालीन राज्यपाल गोपालकृष्ण गांधीजी द्वारा डॉ. अर्चन सरकार सँ भेंट करबाक लेल तत्कालीन राज्यपाल गोपालकृष्ण गांधीजी द्वारा “मिथिला विकास परिषद” कें पत्र भेजल गेल छल जाहि पत्रक पत्रांक संख्या अछि ३६९८-S, दिनांक २७.०८.२००७ कें निर्गत भेल छल।

    परिणामस्वरूप वर्तमान राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठीजी स्वयं एहि ज्वलंत मुद्दाकें गंभीरतापूर्वक संज्ञान लैत मैथिली पढ़ौनी हेतु अपन निजी सचिव एस. के. जाना केर माध्यम सँ विश्वविद्यालयके उप-कुलपतिकें अनुशंसा कयलनि अछि ।

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here