डाॅ.चंद्रमणि झा’क साप्ताहिक अप्रेक’क तेसर प्रस्तुति

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    एम.एल.एकेडमीक गेट पर मैट्रिक परीक्षार्थी सभक प्रवेशक समय रहबाक कारणेँ भीड़-भार रहै. मुकुंद गेट के भीतर दिस तकैत मोटरसाइकिल शनैः शनैः आगू बढ़ा रहल छलाह ता’ बगल सँ एकटा भव्य महिलाक स्वर कान पड़लनि-अपने मुकुंद छी ने ?
    हँ,आ’ अपने ?
    नहि चिन्हलौं हमरा ? बड़का लोकसभक यैह हाल छनि, हम छी कविता. हमरा पिताजीक आवास एखनहुँ लक्ष्मीसागर मे छनि. अपनेक बाबूजी 10 लाख पर अड़ि गेलखिन तs हमर बियाह भागलपुर भs गेल.
    अरे बा ? हँ-हँ चिन्हलौं. एतs ठाढ़ देखै छी-मुकुंदक जिज्ञासा बढ़ि गेल छल.
    हमर मालिक सेकेंड लेफ्टिनेंट छलाह, बड़ जोशगर, कारगिल के लड़ाइ मे शहीद भs गेलाह. हमर सिंउथ नहि देखै छी-उज्जर. वियाहक छब्बे मास भेल छल, यैह एकटा गर्भ-आन्हर पुत्र छथि. बेटाके हाथ पकड़िके लग घीच लेलनि आ कहलखिन आशीर्वाद दियनु.
    मुकुंद शून्य मे चलि गेल छलाह, भक् टुटलनि, हँ-हँ खूब आशिर्वाद दैत छियनि. ई कहैत कविताक हाथ मे अपन भिजिटिंग कार्ड थमा देलखिन आ कहलखिन-हमर प्रार्थना स्वीकार करी कविता, बच्चाक पढ़ाइ-लिखाइ मे कोनो व्यवधान आबय तs हमरा स्मरण करबाक कृपा करब. मुकुंदक भाव प्रायश्चित करबाक छलनि. 15 बरख पूर्वक कविताक निर्दोष रूप एखनहुँ रहिते छनि मोन मे.
    कविता के नमस्कार करैत आगू बढ़ि गेलाह मुकुंद. मुदा, तहिया सँ आइधरि अपन स्वर्गीय पिताक दहेजलोलुप कठोर आकृति रहि-रहिकs मानस पटल पर अवत्तीर्ण भए ललाट पर घोकचल चित्र उभारि दैत छनि.

    (अव्यक्त प्रेम कथा)
    डॉ.चंद्रमणि झा.9430827795.

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