मनाओल जाइत देवोत्थान एकादशीकेँ व्रत

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    दरभंगा,मिथिला मिरर-डॉ.चंद्रमणि झाः कार्तिक मास केँ हिंदू धर्म मे धर्म मास कहल गेल अछि।एहि मासक शुक्लपक्ष एकादशीकेँ देवोत्थान व्रत मनाओल जाइत अछि।एकर पाछू पौराणिक कथा अछिः—-भादव शुक्लपक्ष एकादशी केँ भगवान विष्णु शंखासुर राक्षस केँ घनघोर कठिन युद्ध मे पराजित कैलनि।ततेक थाकि गेलाह जे दू मास धरि घोर निद्रा में रहलाह आ’ आजुक दिन निद्रा त्याग कैलनि।तहिया सँ लोक भगवान केँ आजुक दिन उठबाक हेतु आह्वान करैत निहोरा करैत छनिः—“ब्रह्मेंद्ररुद्ररभिवन्द्यमानो भवानुषिर्वन्दित वन्दनीयः। प्राप्ता तवेयं किलकौमुदाख्या जागृष्व जागृष्व च लोकनाथ।मेघा गता निर्मल पूर्णचंद्रः शारदापुष्पाणि मनोहराणि।अहं ददानीति च पुण्यहेतो जागृष्व जागृष्व च लोकनाथ। उत्तीषठोतिष्ठ गोविंद त्यज निद्रां जगत्पते।त्यव चोत्थीय मानेन उत्थितं भुवनत्रयम्।”

    देवोत्थान एकादशी केँ लोक भरि दिन उपासल रहि साँझ में आँगन में ठाँव-पिठार कैल जाइछ जाहि में अष्टकमल, षष्टकमल, लक्ष्मीनारायण इत्यादिक चित्र सँ अइपन बनाओल जाइछ आ’ गोसाउनिक घर तक जोड़ल जाइछ।आँगन में अन्नाधारण हेतु गोल-गोल व्यास बनाओल जाइछ जाहि में नाना प्रकारक उपलब्ध अन्न राखल जाइछ।अइपन पर ढ़ौरल पाढ़ी,पीढ़ीक चारूकात कुसियार आ’ तकर छीपकेँ बान्हि वेदी तैयार कैल जाइछ।पीढ़ी पर जलपूर्ण कलश आमक पल्लव ताहि पर प्रज्वलित दीप राखल जाइछ।वेदीक समीप नारियर, सिंघार,अल्हुआ,मिश्री इत्यादि राखल जाइछ।व्रती उत्तराभिमुख भए उपर्युक्त मंत्र सँ भगवान विष्णुक संग पंचदेवताक आह्वान करैत छथि।भोर मे माली ढ़ौरल व्यास मे राखल अन्न बटोरिकय लए जाइछ।ई भगवन- जागरणक पर्व थिक

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