भागलपुरमे डेरी आ खगड़ियामे स्थापित होयत पशु आहार कारखाना

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भागलपुर, मिथिला मिरर : ओना त’ सम्पूर्ण मिथिला क्षेत्रमे कृषि मात्र आजीविकाक साधन  अछि। एकटा समय छल जखन मिथिला क्षेत्रमे चीनी उद्द्योग छल। दरभंगाक अशोक पेपर मिल तहिना खादी उद्द्योग आदि छल जाहिमे स्थानीय स्तर पर रोजगार भेटैत छल। एक त’ बाढ़ी माइर दोसर रोजगारक अभाव मिथिला लेल अभिशाप बनि गेल। यैह कारण अछि जे मिथिलासँ पलायन लोकक मजबूरी बनि गेल। कहबी छैक जे समयकेँ संग परिवर्तन अबैत छैक। एहि क्रममे मिथिलामे खेती पथारीक तरीका सेहो बदलल अछि संगे एहिसँ जुड़ल उद्योगक दिशामे लोक आगू बढ़ी रहल छथि। बदलैत समयकेँ संग खेती बारीक संग-संग किसान पशुपालन सेहो करैत छथि जे किसान लेल लाभकारी सेहो साबित भ’ रहल अछि। बिहारक मुजफ्फरपुर स्थित सुधा डेरी, दरभंगा स्थित दरभंगा डेरी, अमृत दूध, तहिना आन-आन जिलामे सेहो कतेकोँ डेरी उद्द्योग चलैत अछि। एहि तरहक उद्द्योगसँ हजारो व्यक्तिकेँ रोजगार भेटैत अछि। एहि क्रममे भागलपुरमे प्रतिदिन दू लाख लीटर क्षमताक दूध डेरी संयंत्र स्थापित कएल जायत। हालाँकि अखनो एतय छोट स्तर पर दूधक डेरी चलैत अछि। तहिना खगड़ियाक महेशखूंटमे हरेक दिन 300 टन उत्पादन वला पशु आहारक कारखाना सेहो लगाओल जायत। नवका दूधक कारखाना खुलबासँ भागलपुर, बांका, मुंगेर आ जमुईकेँ दूध उत्पादन करय वला किसानकेँ बेसी लाभ भेटत। एहिसँ दूध उत्पादनमे सेहो बढ़ावा भेटत। हालाँकि भागलपुरमे प्रतिदिन 60 हजार लीटर क्षमताक दूध संयंत्र अखनि चलि रहल अछि। नवका संयंत्रक संचालन विक्रमशिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ करत। एहिसँ सीधे तौर पर स्थानीय लोककेँ रोजगार भेटतनि। बतादी जे एहिसँ हजारों लोककेँ  दूध बिक्री केंद्र आ परिवहन आदिक माध्यमसँ सेहो रोजगार भेटत।भागलपुरमे डेयरी संयंत्र लगेबामे 8.32 करोड़ रुपैया खर्च होयत। जमुईमे अखनि 10 हजार लीटर दैनिक क्षमताक डेयरी संयंत्र अछि। दू लाख लीटर क्षमताक नवका डेयरी संयंत्रसँ भागलपुरमे दूधक पैंकिगकेँ संग-संग दही आ लस्सीक पैंकिंग सेहो बेसी मात्रामे होयत।

खगड़ियाक महेशखूंटमे पशु आहार कारखाना लगबैमे 36.23 करोड़ रुपैया खर्च होयत। एकर संचालनक जिम्मेदारी देशरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद दुग्ध उत्पान समिति बनौनीकेँ होयत। एहिसँ बेगूसराय, खगड़िया, लखीसराय सहित आसपासक दुग्ध समितीक किसानकेँ उचित मूल्य पर पशु आहारक आपूर्ति कएल जायत। एहिमे 2132 निबंधित क्रियाशील समितीमे एक लाख 69 हजार पशुपालक शामिल छथि। जँ एहन तरहक प्रयास आन आन क्षेत्रमे आओर कएल जाय त’ निश्चित रुपें कृषि जगतकेँ लेल ई वरदान साबित होयत।

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