मिथिलाक राजकुमारी आ दुनियाँक किसान चाची केँ पद्मश्री सम्मान।

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दिल्ली, मिथिला मिरर : हमरा लोकनि जँ आदम आ इवके सिद्धांत मानी त’ स्त्रीक अस्तित्व तखनेसँ अछि। ओ पुरुषक समकक्ष मानव विकासके प्रत्येक चरणमे हिस्सेदार रहलथि अछि। ई बात फराक रहलैक जे सभ धर्मक उत्थानक समयमे स्त्रीके  पुरुषक अधीन राखल गेल। मुदा बितैत समयक संग एहन तरहक वातावरणक अछैत स्त्री अप्पन मान-सम्मान, प्रतिष्ठा, आदर आ अधिकार सुरक्षित कयलनि अछि। जँ मैथिल समाजक इतिहास आ वर्तमान पर दृष्टि केन्द्रित करी त’ थोड़ बहुत जे सक्षम महिलाक नाम अबितो अछि, सेहो विकासक परिदृश्य पर नगण्ये बुझि पड़ैत अछि।

मिथिला अदौकालसँ कृषि प्रधान क्षेत्र रहल अछि। एतय कृषि पूरक रुपे उद्योग रहल जाहि कारणेँ उद्योगसँ उत्पादन आ आर्थिक समृद्धि त’ होइत छल मुदा ई उत्पादन कहियो नहि त’ पूंजीक स्वरुप धारण क’ सकल आ नहि औद्योगिक क्रांतिक वाहक बनि सकल। तकरा बादो एहि आर्थिक आ औद्योगिक क्रियाकलापमे स्त्रीगणक प्रमुख योगदान रहल। खास क’ वस्त्र आ कृषिक क्षेत्रमे हिनका लोकनिक उत्पादन क्षमता आ आर्थिक विकासमे हिस्सेदारीक उपेक्षा नहि कएल जा सकैत अछि। मैथिल समाज पूर्णरूपेण रूढी़वादी रहल जे परंपराक निर्वहन पर बल देलक जाहि कारणेँ आधुनिक खेती-बाड़ीक प्रचार-प्रसारक गति मध्यम रहल। खेतिहर समाजमे शिक्षा नाम मात्र लोक धरि सीमित रहल। मुदा समयक संग-संग बदलाव देखबामे आबि रहल अछि।

मिथिलाक बेटी राजकुमारी देवी सँ किसान चाची होइत सफर पद्मश्री धरि। महिला सशक्तिकरणक अप्रतीम उदाहरण किसान चाची उर्फ पद्मश्री राजकुमारी देवीक जीवनी विस्तारसँ।

58 वर्षीय राजकुमारी देवीक जन्म मुजफ्फरपुर जिलामे एकटा गरीब शिक्षकक परिवारमे भेल रहनि। 1974 मे मैट्रिक परीक्षा पास केलाक बाद हुनकर बियाह सरैया प्रखंड केर आनंदपुर ग्रामवासी अवधेश चौधरीक संग भेलनि। चौधरी चारि भाई छथि आ हुनका हिस्सामे मात्र अढ़ाइ बीघा जमीन छलनि, जाहिमे खेती क’ परिवारक गुजारा करैत छलाह। परिवार शुरुसँ तम्बाकूक खेती करैत छल मुदा एहिसँ घर नहि चलि पबैत छलनि। मुदा राजकुमारी देवी (किसान चाची) पारंपरिक खेतीक प्रथाकेँ तोड़ैत अपन जमीनमे फल-सब्जीक खेती शुरू क’ देलीह। सभसँ पहिने ओल आ अनरनेबा (पपीता)क खेती केनाय शुरू केलीह। उन्नत खेतीक विषयमे ओ राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय पूसामे ट्रेनिंग ल’ अपन खेतमे एकरा प्रयोग करए लगलीह। बातचीतक क्रममे चाची कहलनि जे शुरूमे परिवारक लोक सहयोग नहि केलाह मुदा हम हिम्मत नहि हारलहुँ। सभसँ पहिले ओलक अचार बनेनाय शुरु कएलहुँ आ ओकरा गामे-गाम बेचय लगलहुँ। धीरे-धीरे अपन उत्पादकेँ बाजारमे सेहो स्थापित कयलहुँ।

वर्तमान समयमे किसान चाची ब्रांडके 22-23 तरहक अचार आ मोरब्बा बजारमे भेटैत अछि। हुनक बनाओल समानकेँ माँग निरंतर बढ़ि रहल अछि। आइ भारतवर्षक विभिन प्रान्तमे आयोजित किसान मेला, शिल्प आ लघु उद्योग मेलामे हिनक स्टॉल लगैत छनि। दिल्ली व्यापार मेलामे स्टॉल लगा अपन उत्पादकेँ प्रचार-प्रसारक संगे-संग बेचबो करैत छथि।
ओल, करौना, धात्री, आम, लहसुन, नेबो, आद, लहसुन इत्यादिक अचार, मिक्स अचार संगे मोरब्बाकेँ सेहो खूब डिमांड छनि। मिथिला मिररसँ बातचीतक क्रममे कहलीह जे वर्तमान समयमे हमर समानक खूब माँग अछि। लोकसभ स्टॉलक संग-संग ऑनलाइन सेहो बहुत ऑर्डर करैत छथि। सभसँ खास बात ई अछि जे खेतीसँ ल’ समान बेचबा धरि सभटा अपने करैत छथि। समानक गुणवत्ता एहिसँ पता चलैत अछि जे दिल्ली व्यापार मेलामे सभटा समान मात्र पाँचे दिनमे बिका गेलनि। हिनकर बनाओल देसी पाचक केर बिक्री खूब होइत छनि। राजकुमारी देवी कहलीह जे धन अभावक कारणेँ ओ डिब्बा पर कागज केर स्टीकर लगाक’ अपन सामानक बिक्री करैत छथि। आगाँ कहलीह जे मजदूरी बेसी भ’ गेल छैक ताहि कारणेँ ओ स्वयं मेहनत करैत छथि। आजुक समयमे सलाना टर्नओवर 6सँ 8 लाख टका धरि अछि सरकारकेँ तरफसँ कोनो मदद सेहो नहि भेटैत अछि।

हज़ारों महिलाक रोडमॉडल छथि किसान चाची
राजकुमारी देवी बिहार सरकारक स्वर्ण जयंती रोजगार योजनासँ रोजगार प्रशिक्षण प्राप्त क’ आइ लगभग 40टा समूह बनौलनि, ओ स्वंय आब प्रशिक्षण दैत छथि। लगभग एक हजार स्त्रीगणकेँ स्वरोजगारी बनेलीह। वर्तमान समयमे खेती-बाड़ीक संग पशुपालन, मत्स्यपालन करबाक लेल सेहो प्रेरित आ प्रशिक्षण दुनू देबाक काज करैत छथि। आइ हिनका मार्गदर्शनमे हजारां परिवार आत्मनिर्भर भेल जा रहल अछि। एहि क्रममे पिपरा गामक गीता देवी खेतीकेँ अपन जीविकोपार्जनक साधन बनेलनि आ आइ आर्थिक रुपे समृद्ध छथि। हिनका सभकेँ देखा-देखी रीता शाही सेहो चाचीक सँग जुड़लीह आ अपन तीन बीघा जमीनमे फल आ सब्जी उगा क’ आर्थिक रुपेँ समृद्ध छथि। काजमे हुनक पति सेहो पूर्णरूपे सहयोग करैत छथि। एहन कतेको उदाहरण भेटत जे चाचीसँ सीख आ सलाह लैत आइ खुशहाल जीवन बिता रहल छथि।
जेना चाची कहैत छथि साल 1990मे खेती-पथारी शुरू केने रहथि। शुरूमे हिनकर परिवारक लोकसभ मदद नहि करैत छल मुदा एकर परवाह केने बिना हिम्मतसँ काज करैत रहलीह। धीरे-धीरे समय बदलल 200 रुपैयासँ काज शुरू केने रहथि आ गामे-गाम जा क’ अचार बेचय लगलीह। शुरूमे सभ ताना दैत छलनि जे ई जनानी घरे-घरे अचार बेचैत अछि, मुदा एहि बातक कखनो परवाह नहि केलीह। पहिले पैदल सफर करैत छलीह, ग्रामीण इलाकामे कोनो सवारी नहि छल ताहि कारणेँ एकटा साइकिल कीनलीह। बादमे एहिसँ गामे-गामे जा अपन समानक प्रचार-प्रसार क’ ओकरा बेचैत रहलीह। नितदिन 40-50 किलोमीटरक सफर तय करैत छलीह। लोकसभ नीक नजरिसँ नहि देखैत छलनि। ओ कहलनि जे सगरोसँ तिरस्कार भेटैत छल, लोक दुत्कारैत छल तइयो हमर मनोबल नहि खसल आ निरंतर आगू बढैत गेलहुँ, तकरे परिणाम अछि जे आइ हमर पूरा परिवार हमरा संग अछि आ एकटा सफल उद्यमीक रूपमे हमर नाम लेल जाइत अछि। आइ हम आर्थिक रुपें ठीक-ठाक छी। दुनू बेटीकेँ एमसीए करवा रहल छी, जँ हम दउरी नहि नंघितहुँ त’ आइ एहि जगह पर नहि रहितहुँ।

किसान चाचीके भेटल सम्मान
राजकुमारी देवीक काजक सराहना आइ पूरा मिथिलेटामे नहि अपितु पूरा भारत देशमे भ’ रहल अछि। साल 2006 मे बिहार सरकार हिनका कृषि क्षेत्रक सभसँ पैघ सम्मान ‘बिहार श्री’ सँ सम्मानित केलकनि। साल 2013 मे आयोजित शिल्प एवं लघु उद्योग मेला अहमदाबादमे तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी सेहो हुनका काजकेँ प्रशंसा कएने रहथिन। चाची हुनक प्रशंसा करैत नहि थकैत छथि, एतबे नहि स्टार प्लस पर प्रसारित धारावाहिक “आज की बात है जिंदगी“ कार्यक्रममे सेहो हिस्सा लेलीह आ हिनकर प्रशंसा करैत शो केर होस्ट अमिताभ बच्चन केर शब्द आइयो तक याद करैत भावुक भ’ जाइत छथि। केंद्रीय मंत्री विजय गोयल सेहो हुनका सम्मानित कएने रहथिन। एहिसभ बातके ँ याद करैत राजकुमारी कहैत छथि जे एहि सभसँ मनोबल बढैत अछि आ जोर-शोरसँ काज करबाक प्रेरणा भेटैत अछि।
आब जनानी परिवारक लेल बोझ नहि
मिथिलामे एखनहुँ धरि जनानी केर घरक चौकैठ नंघनाइ पाप बुझना जाइत छैक। एकटा कहावत छैक की ‘‘गे मौगी तोहर अँगने कतेक’’ अर्थात स्त्री केर सीमा आँगन धरि आ जीवन चारि दुआरि तक। एहि परंपराकेँ तोड़ैत किसान चाची आगाँ बढ़लीह। खेती-बारी आ व्यवसाय मूलतः पुरुखक काज मानल जायत अछि, एत’ तक जे पुरुख एहि काजकेँ अप्पन जागीर मानैत छल मुदा बदलैत समयमे ई आब एकटा मिथक बनि रहि गेल अछि। कहल जाइत छल जे जनानी पुरुखक ऊपर बोझ होइत अछि मुदा आजुक समयमे स्त्रीगण खासक’ मैथिलानी सभ क्षेत्रमे जेना व्यापर, रोजगार, मनोरंजन, आईटी, सिविल-प्रशासनिक सेवा, बैंकिंग आदिमे अपन उपस्थिति दर्ज करा चुकल छथि। आब महिला सभकेँ कोनो सीमामे नहि बांन्हल जा सकैत अछि।

किसान चाची पुरुख लोकनिक पुरषार्थ पर आघात करैत कहैत छथि जे जनानी आब मात्र अहाँक आँगनक शोभे टा नहि रहि गेल छथि। आब सभ स्त्री चाहैत छथि जे ओ अप्पन पति केर काजमे हाथ बटाबथि, परिवार केर उन्नतिमे हुनको योगदान रहय। आर्थिक रुपें सेहो मदद भेटट आ ओकरे दम पर परिवाक भरण-पोषणक संग-संग बच्चा सभक उज्जवल भविष्य सेहो लिखल जा सकत। संगहि राजकुमारी महिला सभसँ सेहो कहली की अपन काज करवामे कोनो लाज नहि हेबाक चाही, चाहे ओ कोनो काज होय। काज कोनो छोट नहि होएत अछि। मेहनत, ईमानदारीसँ काज करब त’ सफलता जरूर भेटत स्वरोजगारी बनू, स्वाबलंवी होउ इहे हमर कामना!

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