मिथिला राज्यक प्रबल समर्थक छलाह डॉ. लक्ष्मण झा

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दरभंगा, मिथिला मिरर : जँ अहाँ मैथिल छी आ मिथिला-मैथिलिमे रूचि रखैत छी त’ अवस्से आधुनिक मिथिलाकेँ सभसँ तेजस्वी आ अंतिम विदेह स्वर्गीय श्री लक्ष्मण झाकेँ बारेमे जानबाक चाही। जी हाँ हम बात क’ रहल छी डॉ. लक्ष्मण झाकेँ जे ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालयक पूर्व वाईस चांसलर छलाह, संगे एकटा प्रखर स्वतंत्रता सेनानी आ प्रसिद्ध साहित्यकार आ मिथिला राज्यक प्रबल समर्थक छलाह। कलियुगमे सत्ययुगकेँ मानक पर जिबय वला एकटा एहन महापुरुष जे एक दिश प्राच्य आ पाश्चात्य विद्याकेँ प्रकाण्ड विद्वान छलाह त’ दोसर तरफ औपनिषदिक परम्पराकेँ एकटा एहन ब्रह्मवेत्ता सन्त जिनका लेल ईश्वर भक्तिकेँ समक्ष सभ किछु गौण छल।

डॉ. लक्ष्मण झाक जन्म दरभंगा जिलाक रसियारी गाममे 5 सितम्बर 1916 ई. मे भेल छलनि। शुरुआती पढाई प्रसिद्ध विद्वान पंडित रमानाथ झाकेँ सानिध्यमे भेल रहनि। नेनपनसँ भौतिक आ सांसारिक चीजसँ दूरी बनेने रहलाह। एहन कहब अछि जे पूर्वजन्मसँ बालब्रह्मचारीक संस्कार ल’ आयल छलाह, तखन भला वियाह कोना करताह! 1927 ई. मे  हुनक अभिभावक द्वारा वियाह लेल बाध्य कएल गेल जकर विरोध करैत ओ हाथी परसँ फानी गेलाह। हिनक विरत स्वभावसँ डरैत घरक लोक सभ हिनका वियाह लेल कहब छोड़ी देलनि। जकर परिणाम भेल जे ओ अन्य साधु-संत जेना घर नै छोड़लाह आ अपन अध्ययन पूरा केलाह।

महज 11 सालक उम्रमे ओ स्वतंत्रता आंदोलनमे भाग लेबय लगलाह। साइमन कमीशनकेँ विरुद्ध प्रदर्शन आ 15 सालक उम्रमे 1930-31 के समय सविनय अवज्ञा आंदोलनमे अपन भागीदारी देलनि। समय छल 1934 एहि साल भूकम्प आयल छल आ लखन जी मात्र 18 बरखकेँ छलाह मुदा ओहि अवस्थामे राजेन्द्र प्रसादके बिहार सेंट्रल रिलीफ कमीटीसँ जुड़ी राहत काजमे अपन योगदान देलाह। भागलपुरसँ इंटर, पटनाक पटना कॉलेजसँ संस्कृतमे स्नातक केलाह जाहि लेल हुनका स्वर्ण पदक सेहो भेटल। मुदा 1942क आंदोलनकेँ कारण हुनक स्नातकोत्तरक पढ़ाई बाधित भेल। ई एकटा अग्रणी सक्रिय आंदोलनी छलाह। जखन ओहि साल राजेन्द्र प्रसादकेँ गिरफ्तार कएल गेल त’ अगस्त क्रांतिकेँ नेतृत्वक लेल हुनका बिहार प्रदेश आंदोलन कमीटीक महासचिव बनाओल गेल। हिनके नेतृत्वमे सचिवालय पर झंडा फहरेबाक घटना आ एहिमे पुलिस फायरिंगसँ सात छात्रक मौतक बाद पूरा बिहार अगस्त क्रांतिमे कूदी पडल। कहबी छैक जखन औरदा रहत त’ कियो किछु नै बिगाड़ी सकैत अछि किछु तेहने सन लक्ष्मण झा संग भेल। अचानक मलेरियाक तेज बोखार भेलनि आ हुनका अपन गाम आबय पड़लनि मुदा गामोमे चैनियत कहाँ। गाम अबिते स्वतंत्र जनता राजक घोषणा क’ देलनि आ एक महिना धरि बिरौल क्षेत्रमे ब्रिटिश राज पूर्ण तरहें खत्म भ’ जनता राज कायम रहल जकर देख रेख स्वयंसेवक करैत छल। बादमे ब्रिटिश सत्ता पुनर्स्थापित होयबाक बाद लक्ष्मण झा नेपाल दिस निकलि गेलाह मुदा मुखबिरीकेँ कारण हुनका गिरफ्तार क’ भागलपुर जेल भेज देल गेल। एवम क्रममे स्वतंत्रता प्राप्तिक बाद जेलसँ छुटलाह आ सरकारक छात्रवृत्ति पर 1947 मे आगू पढ़बा लेल इंग्लैंड चलि गेलाह। ओतयकेँ एकटा मजेदार खिस्सा अछि एमएमे एडमिशन त’ लेने छलाह मुदा एमए कम्प्लीट नै भेल छलनि, इंग्लैंड जेबाक बाद सीधा पीएचडी करबा लेल अनुमति माँगलनि। बिना एमए सीधा पीएचडी माँगय वला छात्र लेल इंटरव्यू हेतु पैनल बनाओल गेल तकरा बाद डॉ केनेथ केडिंगशकेँ निदेशन ओ “मिथिला और मगध” विषय पर शोध पूरा केलनि आ 1949 मे भारत लौट एलाह। सभसँ पहिने पटनाक काशीप्रसाद जयसवाल शोध संस्थानमे उपनिदेशक पद पर नौकरी केलनि, बादमे 1952 मे समाजवादी दलक टिकट पर चुनाव लड़लाह मुदा अपने पार्टिक नेता सभक षड्यंत्र आ कुटिल चालिकेँ कारण हारी गेलाह। तकरा बाद राजनीतिसँ सन्यासक घोषणा देलनि। हालाँकि बादमे सीएम कॉलेज दरभंगामे व्याख्याता पद पर नौकरी केलनि। ‘मिथिला’ साप्ताहिक पत्रिकाक प्रकाशन सेहो आरंभ केलाह। एकटा प्रखर लेखकक तौर पर नेता सभक एतेक आलोचना केलाह की हिनका नौकरीसँ निकाली देल गेल। लक्ष्मण झा यैह चाहैत छलाह। दरभंगा महाराज द्वारा संचालित ओहि सम्यक प्रमुख अख़बार द इंडियन नेशनमे 1963-1972 क बीच  हुनक 130 लेख  छपल छल मुदा अख़बारकेँ कांग्रेसी रुझानक कारण करार टूटी गेल। गाममे 43 बीघा जमीन हेबाक बादो लेख छापी अपन गुजर बसैर करैत छलाह। बादमे जखन 1977 मे कर्पूरी ठाकुर मुख्यमंत्री बनलाह त’ हुनका मिथिला विश्वविद्यालयक कुलपति बनबा लेल आग्रह केलनि। अपन शर्तक मुताबिक ओ नौकरी केलाह। कर्तव्यक प्रति एतेक निष्ठावान छलथि जे क्लास नै लेबय वला शिक्षक सभक वेतन रुकवा दैत छलाह। ई मिथिलाक दुर्भाग्य छल जे एतेक विद्वत आ पौरुषी व्यक्तिकेँ पहिचान नै सकल आ अंतमे आरिज आबि त्यागपत्र द’ देलाह।

एकर बाद लेखन, भक्ति आ साधनामे लागि गेलाह। बेहद एकांतप्रिय आ अपरिग्रही छलाह। भरी जिनगी विवाह नै केलाह आ ब्रह्मचारी रहलाह। ओ हिंदी, अंग्रेजी आ मैथिली तीनू मिला लगभग 50 सँ ऊपर किताब लिखलनि मुदा ओ छपवाबै लेल नै चाहैत छलाह। 1950-52 क बीच आठ्ता किताब छपल जाहिमे  नेहरू आ अन्ग्रेजक षड्यंत्रक बारेमे लिखलाह जाहि कारण नेहरू जी सभटा किताबकेँ प्रतिबंधित क’ देलनि। लक्ष्मण झा मिथिला-मैथिलीक मुहीमके एकटा नव रूप देलनि। 1952 मे अलग मिथिला राज्य लेल एकटा पैघ आंदोलन केलनि। बादमे ओ मात्र मिथिला-मैथिली लेल काज केलाह।

विद्वान एतेक जकर तुलना नै कएल जा सकैत अछि। 2000 ई. मे आईकेँ दिन हिनक निधन भ’ गेल। मिथिला लेल एकटा अपूर्णीय क्षति छल। एहन विलक्षण संत, साहित्यकार, स्वतंत्रता सेनानी आ मिथिला मैथिलीक हितैषी युग पुरुष डॉ. लक्ष्मण झाकें पुण्यतिथि पर शत-शत नमन!

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