“तेजस” बनेनहार आब बना रहल छथि बच्चा सभक भविष्य

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दरभंगा, मिथिला मिरर : मिथिला सतत विद्वान लोकक धरती रहल अछि। शुरुएसँ इ भूमि पर माँ सरस्वतीक असीम कृपा रहल अछि। एहि धरा पर एकसँ एक इतिहासकार, साहित्यकार, कवि, वैज्ञानिक आ नै जानी कतेको विधाक महिषी लोकनि भेलाह जे मिथिलाकेँ गौरवान्वित करैत रहलाह। वर्तमान समयमे हमसभ वैज्ञानिक युगमे जिबि रहल छी। नित नव आविष्कार होइत रहैत अछि। एहने सन रक्षा क्षेत्रमे एकटा आविष्कार भेल छल तेजस विमानकेँ। ई विमान बनेबाक गौरव भेटलनि एकटा मैथिल ललना डॉ. मानस बिहारी वर्माकेँ। जुलाई, 2005मे सेवानिवृत्त भेलाक बाद ओ अपन मातृभूमि मिथिला लेल किछु करबाक निश्चय केलनि। भले आई सुदूर दूर-दराजक सरकारी स्कूलमे प्रयोगशाला नै होई, मुदा ओहि स्कूलमे पढ़य वला गरीब घरक बच्चा विज्ञानक कठिनतम प्रयोगकेँ चुटकीमे हल क’ रहल छथि। दू जूनक रोटीक लेल दिन-राति एक करय वला परिवारकेँ लेल अपन बच्चाकेँ लैपटॉप, कंप्यूटर आ स्मार्ट फोन देब सहज नै थिक। मुदा पिछड़ल इलाकामे रहयवला बच्चा सभ आई नव-नव टेक्नोलॉजीक उपयोग करयमे दक्ष होइत देखल जा रहल अछि। एहने बच्चा सभकेँ सक्षम बना रहल छथि देशक प्रथम स्वदेशी लड़ाकू विमान “तेजस” बनबै वला टीमक प्रोजेक्ट डायरेक्टर रहल पद्मश्री मानस बिहारी वर्मा।

एकटा खुशहाल जीवन त्यागि पहुँचि गेलाह गाम

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) सँ जुलाई, 2005 मे सेवानिवृत्त भेलाक बाद बेंगलुरुमे पाँच सितारा जीवनकेँ त्यागि अपन गाम पहुँची गेलाह। बिहारक दरभंगा जिलाक घनश्यामपुर प्रखंडक बाउर गाम। एहि 13 सालमे दरभंगा जिलाक शायद कोनो गाम अछि, जतय हुनक टीम नहि पहुँचल हैत। डॉ. वर्माक मानब छनि जे बच्चा सभमे वैज्ञानिक प्रवृत्ति पैदा होइ जाहि लेल आवश्यक अछि जे ओ स्वत: प्रयोग करैथ आ सिखैत। जखन कोनो चीज महसुस करब तखने ओकर समाधान खोजब। बात एहन अछि जे सेवानिवृत्त भेलासँ पहिने हुनका दूटा अवार्ड भेटल छल। ओहिसँ भेटल राशिसँ गामक निरक्षरकेँ शिक्षासँ जोड़बाक लक्ष्य बनौलनी। बिजली नै रहला पर जेनरेटरक व्यवस्था कएलनि। हाईस्कूलक बच्चाक समूह बनौलनी। शुरुमे निरक्षर आ जरूरतमंद छोट बच्चाक समूहकेँ एक घंटा अक्षर ज्ञान दैत छलाह। ओ विज्ञान, गणित आ अंग्रेजी पढ़बैत छथि।

तीनटा मोबाइल लैबसँ भेट रहल अछि 120 स्कूलकेँ लाभ

दरभंगा जिलाक 120 सरकारी स्कूलमे मोबाइल लैबकेँ माध्यमसँ शिक्षक आ छात्र दुनू विज्ञानमे प्रयोगक महत्व आ बारीकी सीख रहल छथि। शिक्षक लोकनिकेँ प्रशिक्षण देलाक बाद स्कूलमे रसायन विज्ञान, भौतकी, जीव विज्ञान आ जीवन विज्ञानक प्रयोगसँ संबंधित उपकरण उपलब्ध कराओल जाइत अछि। एतबे नहि जाहि स्कूलमे विज्ञान शिक्षकक अभाव रहैत छैक, ओतय हुनक टीम मेंबर बच्चा सभके प्रयोग केनाई सिखबैत छथि। मोबाइल वैनक जरिये एक स्कूलमे दूसँ तीन मास धरि कैंप क’ बच्चा सभकेँ विज्ञान आ कंप्यूटरक बेसिक जानकारी देल जाइत अछि। वास्तवमे शिक्षा क्षेत्रमे हिनका द्वारा कएल गेल काज बहुत सराहनीय अछि।

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