मिथिलाक सभ्यता-संस्कृति सभसँ अलग आ अनमोल : डीएम कपिल अशोक

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मधुबनी, मिथिला मिरर : मिथिलाक सभ्यता आ संस्कृति सभसँ अलग पहचान रखैत अछि। एतयकेँ लोकसभ अपन बौद्धिक क्षमताक बल पर देश-दुनियाँमे सफलताक परचम लहरा रहल छथि। मधुबनी जिलाक राजनगर स्थित राजपरिसर ऐतिहासिक आ पुरातात्विक महत्वक विशिष्ट स्थल अछि। एहि जगह पर साहित्य आधारित कार्यक्रमक आयोजन प्रशंसनीय पहल अछि। एहन सन उदगार व्यक्त केलनि मधुबनिक जिलाधिकारी शीर्षत कपिल अशोक। राजपरिसर स्थित गिरिजा मंदिर प्रांगणमे सीएसटीएस, दिल्लीक तत्वावधान आ इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र, साहित्य अकादमी आओर गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति, नई दिल्ली व वीएसजे कॉलेज आ एसएसबी 18वीं वाहिनीक संयुक्त सहयोगसँ आयोजित मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवलक उद्घाटन समारोहमे बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करैत कहलाह। डीएम शीर्षत कपिल अशोक कहलनि जे तकनीकी बाधाक कारण राजपरिसरक विकास बाधित अछि। मुदा जनसहभागितासँ शक्ति आ भक्तिक परम्पराकेँ साक्षी एहि विशिष्ट स्थलक विकास कएल जा सकैत अछि। उम्मीद अछि विद्वान लोकनिक इ समागम मानव सभ्यताक दशा- दिशा बदलबाक काज करत।

आयोजित समारोहक शुभारम्भ मधुबनी लिट् फेस्टिवल आयोजिका प्रोफेसर सविता झा खानकेँ स्वागत भाषणसँ शुरू भेल। कार्यक्रममे विषय-वस्तुकेँ शुरुआत करैत डॉ. सविता झा खान कहलनि जे भग्नावशेष भ’ रहल राजपरिसर एहन पुरातात्विक धरोहरकेँ संरक्षित आ मिथिलाक बहुभाषि समुदायकेँ अपन धरोहरक संरक्षण आ समृद्ध साहित्य-कलाकेँ संरक्षण-संवर्धन वास्ते इ आयोजन कएल गेल अछि। समारोहकेँ पद्मश्री बौआ देवी, विश्वेश्वर सिंह जनता कॉलेजक प्राचार्य डॉ. हीरानंद आचार्य, एसएसबी कमान्डेंट अजय कुमार, भाषा वैज्ञानिक प्रो रामावतार यादव, प्रो भीमनाथ झा, पुरातत्वविद फनिभूषण मिश्रा सहित अनेको गणमान्य अतिथि लोकनि संबोधित केलाह सभ वक्ता मिथिलाक संस्कृति संरक्षण, भाषा-साहित्यक विकास पर जोर देलनि। संगहि वक्ता लोकनि मैथिलीक पिछड़ापनक कारण स्थानीय राजनेता आ जनप्रतिनिधि लोकनिकेँ सेहो मानैत छथि। मुदा एकटा सत्य इहो अछि जे जतेक काज आ शोध मिथिला, मैथिली विषय पर भ’ रहल छैक, ओते काज कोनो आन विषयमे नहि भ’ रहल अछि।

प्रथम सत्रमे हाट बाजार मिथिलाक स्थानीय उद्योग, पोखरि रजोखरी, दोसर सत्रमे ग्राम गाथा, मिथिलामे पुरातात्विक संरक्षण आ समस्या, तेसर सत्रमे मिथिलाक दर्शन आ ज्ञान परंपरा, मिथिलामे तंत्र परंपरा उद्भव आ विकास, तंत्र उपासनाक लौकिक पक्ष विषय पर विद्वान लोकनि अपन विचार रखलनि। अंतिम सत्रमे सांस्कृतिक कार्यक्रमक आयोजन कएल गेल जाहिमे लोकसभ बढ़ी-चढ़ी क’ हिस्सा लेलाह।

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