मिथिलाक्षरकें संवर्धन आ संरक्षणक आवश्यकता अछि : कुलपति डॉ. विद्याधर मिश्र

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    दरभंगा, मिथिला मिरर: पांडुलिपीकें संरक्षणक संग-संग ओहिमे संरक्षित ज्ञानक जानकारिक लेल मिथिलाक्षरक सेहो संरक्षण आ संवर्धन कएल जाए। कार्यशालामे पांच दिनमे विषय विशेषज्ञ पांडुलिपि संरक्षणकें जे टिप्स देलनि अछि ओकरा दुनू विविकें लाभ उठेबाक चाही। प्राचीन भारतीय इतिहास, पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग लनामिविवि दरभंगा तथा पांडुलिपि संरक्षण केंद्र पटनाक संयुक्त तत्वावधानमे आयोजित कार्यशालाक समापन सत्रमे मुख्य अतिथि संविविकें कुलपति डॉ. विद्याधर मिश्र प्रतिभागीकें संबोधित करैत उक्त बात कहलनि।

    ओ मिशनके काजक सराहना करैत कहलनि जे, जे काज हमरा सबकेँ करबाक चाही ओ काज मिशन द्वारा कएल जा रहल अछि। अप्पन संस्कृति आ धरोहरकें संरक्षित रखबाक जिम्मेवारी हमरा सभक अछि। ओ कहलनि जे, भौतिक सुखक प्रति हमर बढ़ैत प्रवृत्ति हमरा अपन परंपरा सं दूर कय रहल अछि।

    अहि अवसर पर विशिष्ट अतिथि पूर्व विधान पार्षद डॉ. विनोद कुमार चौधरी अपन संबोधनमे कहलनि जे, कार्यशाला हमरा उर्जावान बनबैत अछि। नब अनुभव सं लैस करैत अछि। यदि हम अपन धरोहरकें संरक्षित नहि करब त इतिहासमे संशोधन आ परिवर्तनक संभावना समाप्त भए जाएत।

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