मिथिला रत्नसँ सम्मानित भेलाह अशोक झा

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    मिथिला मिरर: विदित हो कि अति प्राचीन व मीठगर मैथिली भाषाकें भारतीय संविधानक आठम अनुसूचिमे तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयीजी द्वारा क्रमशः लोकसभा व राज्यसभामे ध्वनिमतसँ पारित करबाके संवैधानिक दर्जा दिआओल गेल छल। २२ दिसम्बर, २००३ कें लोकसभा एवं २३ दिसम्बर, २००३ कें राज्यसभामे प्राचीनतम मैथिली भाषाकें संवैधानिक स्तर पर स्वीकार करैत करोड़ों मैथिली भाषा-भाषीकें चिर-आकांक्षित माँग स्वीकार करैत ऐतिहासिक डेग उठाओल गेल छल।
    सम्पूर्ण मिथिलांचल भूतपूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयीकें कोटिशः धन्यवाद व नमन करैत आह्लादित छथि। संवैधानिक मान्यताक उपरांत निर्णय लेल गेल जे प्रत्येक बरख उक्त ऐतिहासिक तिथिकें “अधिकार दिवस” केर रूपमे आयोजित कयल जाय। क्रमशः प्रत्येक बरख विभिन्न नगर-उपनगर व महानगरमे “अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन” आयोजित होइत आबि रहल अछि। एहि बरख झारखंड राज्य स्थित परम पावन तीर्थस्थली भूतभावन महादेवक पवित्र नगरी बैद्यनाथ धाममे “तेरहम अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन” विधिवत् बाबाक दरबारसँ शोभा-यात्रा व प्रभात फेरी केर रूपमे शुभारम्भ भेल।
    द्वि-दिवसीय आयोजनमे मिथिलाक सामाजिक, वैचारिक एवं संस्कृतिसँ जुड़ल अनेकों महत्वपूर्ण विषय पर उपस्थित विद्वत मैथिलजन द्वारा गंभीर चर्चा-परिचर्चाक हेबाक संभावना अछि आ निष्कर्षक बाट जोहि रहल छथि मिथिलाक मैथिल समाज। एहि सम्मेलनके महत्वपूर्ण आ आह्लादित करयवला बात अछि मैथिली भाषा, साहित्य एवं मिथिलाक सर्वांगीण विकासक हेतु समर्पित संगहि साहित्य अकादमी, नई दिल्ली, मे मैथिली परामर्शदातृ समितिक पूर्व सदस्य, नाट्यकार, “मिथिला विकास परिषद” कोलकाताके अध्यक्ष अशोक झा कें मिथिलाक पारम्परिक परिधान यथा पाग, अंगवस्त्रम् एवं प्रशस्ति-पत्रसँ “मिथिला रत्न – २०१६” सँ सम्मानित करब। एहि सम्मान-समारोहमे मैथिली भाषाक अतिरिक्त, संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त विभिन्न भाषा-भाषायी साहित्यकारकें सम्मानित कयल गेल।
    परिषदक अध्यक्ष अशोक झा एहि अवसर पर अपन सम्बोधनमे आयोजनकर्ताकें धन्यवाद ज्ञापित करैत अपन ओजपूर्ण वक्तव्य केर माध्यमे उपस्थित विशाल जनसमूहकें सम्बोधित करैत कहलनि – “जे वस्तुतः ई सम्मान मिथिला-मैथिल-मैथिलीक सर्वांगीण विकास हेतु समर्पित सेनानीक सम्मान थिक । मिथिलाक विकास हेतु मिथिला राज्यक गठन हयब नितांत आवश्यक अछि। बिना राज्य गठनक ठोस उपलब्धिसँ मिथिला वंचित रहत। आवश्यकता अछि विभिन्न मैथिलसेवी संगठन अपन अस्तित्व यथावत् कायम रखैत “मिथिला राज्य” हेतु एकठाम एकत्रित भS चिर-आकांक्षित माँगकें साकार करबाक निमित्त दृढ़संकल्पित होई।”
    उक्त अवसर पर बिहारक पूर्व मंत्री विनोदानंद झाक पुत्र कृष्णानंद झा दीप प्रज्जवलित कय “द्वि-दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन” केर विधिवत् उद्घाटन कयलनि । मैथिली साहित्यकें शीर्षस्थ साहित्यकार यथा रामभरोस कापड़ि ‘भ्रमर’, चन्द्रेश, डॉ. बुचरू पासवान, सुप्रसिद्ध हास्यकवि जय प्रकाश चौधरी ‘जनक’, मिथिला विश्वविद्यालय केर उप-कुलपति राकेश कुशवाहा आदि उपस्थित छलाह।
    आई प्रातः काल बाबा मंदिर परिसरसँ प्रभात फेरीक विलक्षण झांखी निकलल छल जाहिमे कृष्णानंद झाजी, बैद्यनाथ चौधरी ‘बैजूजी, अशोक झा, डॉ. बुचरू पासवान, शैल झा, करूणा झा, प्रो. साकेत झा आदि अनेकों गणमान्य भाग लेलन्हि। सम्मेलन केर प्रधान अतिथि झारखंड सरकारक श्रममंत्री राज पलिवार अपन अभिभाषणमे मैथिलीके झारखंड प्रान्तमे सभ प्रकारें संरक्षण एवं संबर्द्धन हेतु सहयोगक प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त कयलनि । विद्यापति सेवा संस्थान केर महासचिव बैद्यनाथ चौधरी ‘बैजूजी’ आगन्तुक अतिथिगणकें स्वागत कयलनि।
    द्वारा – राजकुमार झा

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