आगि लगौ बरू बज्र खसौ, धसना धसौ बरू फटौ धरती

    0
    55

    दिल्ली-मिथिला मिररः आजुक तारीख मिथिला-मैथिलीक लेल बहुत बेसी क्षतिकारक रहल अछि। एहन क्षति जेकर भरपाई शायद कहियो नहि भ सकैत अछि आ कोनो व्यक्ति ओहि स्थान कें नहि भरि सकैत छैथ। जी हां, 5 नवंबर 1998 क मां मैथिली एकटा एहने अनमोल रत्न कें अपना कोरा मे सं विलीन होइत देखने छलथि। मिथिलाक एकटा एहन बेटा जिनकर उपस्थिति नहि सिर्फ भारत अपितु विश्वक कतेको देश मे छल आ दुनिया हुनका सोझा नतमस्त होइत रहल छल। हम बात क रहलौ अछि मैथिलीक ओहि हीराकें जिनका हम अहां वैद्यनाथ मिश्र ‘यात्री’ आ दुनिया नागार्जुन’क नाम सं जानैत छन्हि। 5 नवंबर 1998 क बाबा हमरा लोकन्हि कें आंखि मे नोर द दरभंगाक ख्वाजा सराय मे अपन अंतिम  स्वांस लेने रहैथ। बाबा’क पहिचान एकटा एहन साहित्यकारक रूप मे छन्हि जिनकार नाम आबिते समस्त कलमक जानकारक हृदय मे हुनका प्रति सम्मान सहज रूप मे देखल जा सकैत अछि। कालांतर मे बाबा हिन्दी आ संस्कृत सहित अनेकानेक भाषाक प्रकांड विद्वान पंडित राहुल सांकृत्यायन’क बाद दोसर यायावर छलथि।

    आधुनिक काल कें लेखक वर्ग मे बाबा एकटा पहिचान एकटा एहन लेखकक छलनि जे कमलक माध्यम सं सत्ता आ ओहि मे भ रहल बंटाधार के जमि क कुठाराघात केने छथि। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी आ हुनका द्वारा सत्ता कें कैल जा रहल दोहन कें निशाना बनावैत बाबा ओ कविता जाहि मे ‘‘धिक्कार-धिक्कार’’क स्वर बुलंद अछि ओकरा कें बिसरि सकैत अछि। बाबाक पोथी ‘जीवन पथ’ कें पढ़लाक बाद अहि बातक अंजादा लगाओल जा सकैत अछि कि बाबाक कमल मे कतेक ताकत छलन्हि। बाबाक कृत अहि प्रकारेण अछि 6 स अधिक उपन्यास, एक दर्जन कविता-संग्रह, 2 खण्ड काव्य, 2 मैथिली;(हिन्दी में अनूदित) कविता-संग्रह, एक मैथिली उपन्यास, एक संस्कृत काव्य “धर्मलोक शतकम” तथा संस्कृत से कुछ अनूदित कृतियों के रचयिता।
    कविता-संग्रह – अपने खेत में, युगधारा, सतरंगे पंखों वाली, तालाब की मछलियां, खिचड़ी विपल्व देखा हमने, हजार-हजार बाहों वाली, पुरानी जूतियों का कोरस, तुमने कहा था, आखिर ऐसा क्या कह दिया मैंने, इस गुबार की छाया में, ओम मंत्र, भूल जाओ पुराने सपने, रत्नगर्भ।
    उपन्यास- रतिनाथ की चाची, बलचनमा, बाबा बटेसरनाथ, नयी पौध, वरुण के बेटे, दुखमोचन, उग्रतारा, कुंभीपाक, पारो, आसमान में चाँद तारे।
    व्यंग्य- अभिनंदन
    निबंध संग्रह- अन्न हीनम क्रियानाम
    बाल साहित्य – कथा मंजरी भाग-१, कथा मंजरी भाग-२, मर्यादा पुरुषोत्तम, विद्यापति की कहानियाँ
    मैथिली रचना- पत्रहीन नग्न गाछ, साहित्य अकादमी द्वारा सम्मानित कवि (कविता-संग्रह), हीरक जयंती (उपन्यास)।
    बांग्ला रचना- मैं मिलिट्री का पुराना घोड़ा (हिन्दी अनुवाद)
    ऐसा क्या कह दिया मैंने- नागार्जुन रचना संचयन।
    बाबाक रचना मे कालिदास आ आदि कवि बाबा विद्यापतिक सेहो अंश देखल जाइत छलनि, संगहि बौद्ध ओ माक्र्सवादक जे छाप छल ओ बाबाक चिर परिचत स्वभाव मे झलकैत अछि। बाबाक व्यक्तित्व एहन छलनि जे जन संघर्ष मे अडिग हो, जनता सं अथाह लगाव आ न्याय समाजक स्वप्न देखैत हो। भाषा पर गजब कें संतुलन, देसी बोली आ ठेठ अंदाज ई बाबाक पहिचान छलनि मुदा अपन तार्किक शक्ति सं केकरो छन मे धरासायी क देवाक जे क्षमता बबा मे रहैन ओ शायद आब कोनो भी रचनाकार मे भेनाई असंभव अछि। मिथिलाक अहि सपूत कें मिथिला मिरर परिवार दिस सं कोटि सं प्रणाम आ हार्दिक श्रद्धांजलि।

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here