मिथिलाक महान कवि चंद्रभानु सिंहकें अंतिम प्रणाम करैत शिव कुमार झा ‘टिल्लू’क पुष्प

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    पुनीत नमन !! महाकवि चंद्रभानु सिंह श्रीमान !!! अपने छी मैथिली नवगीतक प्राण !! कृति के नहि होईछ अवसान !!! हे मिथिलाक दिनमान ..सकारू अंतिम प्रणाम !
    हम बाटक कवि छी ( संस्मरण ) शिव कुमार झा ‘टिल्लू’
    उच्च विद्यालय बैद्यनाथपुर ( रोसड़ा, समस्तीपुर ) मे कक्षा नवम वर्गक छात्र छलहुँ. ओना त’ पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधीक मुइलाक लगभग ढेढ़ वर्ख भ’ गेल छल , मुदा ओ दुःखद घटना टटके जकाँ बुझायत छल.
    भोरुका स्कूल चलैत छल . गरमीक जुआनी गत्र-गत्रकेँ गटकि लेबाक लेल तत्पर ! छुट्टीक घंटी बाज’ बला छल की मैथिली साहित्यक चर्चित आशु कवि श्री चन्द्रभानु सिंह विद्यालय पर अचकेमे आबि गेलथि . हुनका हाथमे इंदिरा गांधी जीक प्रति श्रद्धा सुमन अर्पितसँ अर्पित एकटा हिन्दी कविताक पम्पलेट …
    ” फिर चली वहाँ जहाँ से आ गयी थी इंदिरा
    छोड़कर जमीन आह ! इंदिरा चली गयी. बहुत सारगर्भित पद्य लिखने छलाह ..मात्र २० पैसा दाम छल , हमहूँ कीनि लेलहुँ…हमर प्रधान अध्यापक स्वर्गीय गुरुवर ईश्वरनाथ ठाकुर जी कांग्रेस पार्टीक अनन्य समर्थक छलथि ..ओहि काल त’ बेसी रास लोक इंदिरा जीक प्रति नमन करिते छल…..सभ पम्प्लेट बिका गेलनि … तकर बाद चन्द्रभानु सिंह जी एक पर सँ एक मैथिली गीत गाब’ लगलाह ..
    मधु केर पड़ल दुलेब कोइलिया घुलल घामल बोल छौ
    की कहियौ गे करिकी तोहर बाजब बड़ अनमोल छौ
    तोरे स्वरक टघार सहारे रटय पपीहरा पी पी
    ककरा ने ई छैक सेहन्ता तोहर बाजब टी पी
    बेसुराह मनुखक समाज सँ तोहर फराके टोल छौ
    की कहियौ गे करिकी तोहर बाजब बड़ अनमोल छौ …
    ई गीत त’ हमरा क्षेत्रक नेनाक कंठ गान जकाँ भ’ गेल छल……चन्द्रभानु जीक कवित्वक सुपौल , बिरौलसँ ल’ क’ रोसड़ा अनुमण्डलक गाम -गाममे बहुत लोकप्रियता छलनि . ताहि काल हुनक हिन्दी लेखन आ सभ सँ पहिने हिन्दी काव्यक पाठ करबाक कारण नहि बूझ’ मे’ आओल.
    काल बितैत गेल ..२ वर्खक बाद ..दड़िभंगासँ अबैत छलहुँ. संगमे आर मित्रक संग संग वर्तमान मैथिली -हिन्दीक चर्चित गतिमान साहित्यकार श्री रवि भूषण पाठक जी छलथि . बिहार विधानसभाक आम चुनावक समय छल ..बहेड़ीसँ सवारी नहि भेंटल ..पयरेँ विधा भ’ गेलहुँ . आगाँ भेँटतहि पुनि चन्द्रभानु बाबूक दर्शन . ओ अपन साईकिलकेँ गुरकाबैत हमरे सभ संगे.संगे चलि देलथि ..जाइत कतहु आर छलाह मुदा हमरे सभक संग करियन आबि गेलाह ..यात्रा सुखद रहल ..एक दू ठाम रुकि-रुकि क’ पहिने हिन्दीक एक -आध कविता ..फेर लोक जुटिते मैथिली पकड़ि लैत छलथि ..हम सभ फेर नहि बूझि सकलहुँ एहि परिवर्तनक कारण…..
    रातिमे हमरे ओहिठाम रुकलथि…बाबूजीकेँ हुनक बाटक कृत्त कहि देने छलियनि. हुनका प्रश्न करिते चन्द्रभानु जीक विकल राग …” कवि जी ! अपन मिथिला मे आब मैथिली गुमकी मारि रहल छथि ..गीतनाद भोजपुरी आ गप्प शप्प सभ हिन्दीमे शुरू भ’ रहल अछि….हम बाटक कवि छी ! जौं मैथिलीमे अपन गायन प्रारम्भ करैत छी…त’ लोक घुसक’ लगैत अछि .तें पहिने हिन्दीक पोठीक बोर द’ जुआयल माँछ सभकेँ फँसबैत छी ..फेर मैथिली गबैत छी….एत’ जुआयल माँछ माने मैथिलीसँ विमुख भेल जा रहल किछु मातृहन्ता मैथिल लोकनि ..जाधरि जीयब जगयबाक प्रयास करब ..हमहीं टा की बहुत सिनेही क’ रहल छथि चंद्रभानु बाबूकें स्मरण करैत मैथिलीक सिद्धस्त हस्ताक्षर “रमानंद झा रमन” लिखैत छथि।

    (“के नहि जानय सौंसे मिथिला शिव तोहर अनुयायी
    सबहक संगे तैयो डूबल हम्मर गाम नदियामी
    दुखे बरात साजि उतरल छल, घौंसा बाजय द्वारा
    ने एहि पार रहलियै भोला, नै गेलियै ओहि पार।”
    मैथिलीक प्रसिद्धि गीतकार चन्द्रभानु सिंह ( 01 मार्च, 1922- 19 अक्टूबर, 2016)क देहावसान अपन गाम नदियामीमे भए गेलनि। राति मे जे सूतलाह फेर उठलाह नहि। 2004 मे ‘शकुन्तला’ महाकाव्य पर साहित्य अकादेमीक पुरस्कार भेटल छलनि। एतबे नहि हिनक कोइली कविता बहुत बेसी चर्चित भेल छलनि। ‘‘मधुकेर पड़ल दुलेब कोयलिया, घोलल घामल बोल छौ। की कहियो गे करिकी तोरा, बाजब बड़ अनमोल छौ’’)

    शेष अस्तु
    जय मिथिला जय मैथिली

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