मौसमक माईर, कतहु सूखा कतहु बाढ़ि

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    मिथिला मिरर-शिवेश झा: भारत कृषि प्रधान देश अछि, एतय कृषि मुख्यतः मॉनसून पर निर्भर रहैत अछि।बिहार उत्तर भारतक महत्त्वपूर्ण कृषि समर्थ्य राज्य मानल जाईत रहल अछि, मुदा बदलैत मौसमक गतिविधि सं अक्सर अहि क्षेत्रक कृषि उत्पादन प्रभावित होईत रहल अछि। जतय एक दिस सुपौल, सीतामढ़ी, दरभंगा, मधेपुरा, चंपारण, पूर्णियां, अररिया इत्यादि जिला बाढ़िक चपेट सं ग्रसित अछि, ओतहि मुजफ्फरपुर, भागलपुर, मधुबनी, समस्तीपुर इत्यादि जिला मे कम बारिशक कारने कृषि त्राहिमाम कय रहल छथि।

    दुनू स्थिति, अतिवृष्टि आ अल्पवृष्टि स नहि मात्र कृषि उत्पादन बल्कि आम जीवन सेहो प्रभावित भेल अछि।जाहि मे मधुबनी, मुजफ्फरपुर तथा भागलपुर के किछु भाग त एहनो अछि जतय पिछला पाँच साल स लागातार सूखाड़क स्थिति बनल अछि। अहि जिला मे आइयो अधिकांश मध्यवर्गीय किसान खेती पर निर्भर छथि। एहेन मे यदि फसल बर्बाद होईत अछि त सालभरि अहि किसान के मुसीबतक सामना करय पड़तनि। कतेको बेर त ई मात्र सरकारी अनुदान पर निर्भर रहैत छथि।

    सब साल सरकार कम वर्षा बला जिलाक फसल बचेबाक उपाय पर विचारक लेल एकटा समिति गठन करैत अछि, मुदा आई धरि बाढ़ि आ सुखाड़क उपायक लेल कोनो ठोस पहल नहि कायल गेल।एकटा रिपोर्टक अनुसार कम वर्षाक चपेट मे अधिकतर पूर्वोत्तर बिहारक जिला अबैत अछि। यदि अगिला किछु दिनक भीतर वर्षाक स्थिति नहि सुधरल त फसल पूर्णरूपे बर्बाद भय जायत।

    हालाँकि राज्य सरकार फसल बर्बादी के रोकबाक प्रयासक तहत कम बारिश बला जिला मे सूखाड़ स निपटबाक लेल डीजल पर प्रति एकड़ 15 सौ रुपैयाक सब्सिडी दैत रहल अछि। परन्तु प्रश्न ई अछि जे, डीजल सब्सिडी दय क या अहि तरहक अस्थायी प्रयास स कहिया धरि आ कतेक सुधार संभव अछि।

    जरूरी ई अछि जे, कृषि प्रधान देश मे सिंचाईक संग-संग बाढ़ि संभावित क्षेत्र मे एकर निदानक समुचित व्यवस्था कायल जाय, ताकि कृषि उत्पादन बढ़ि सकय आ बाढ़ि संभावित क्षेत्र मे बेर-बेर भय रहल विस्थापन स बढ़ैत अव्यवस्था के नियंत्रित कायल जा सकय।

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