लूट को धन फूफू को श्राद्ध ‘काली कान्त झा तृषित’

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    काठमांडू,नेपाल-मिथिला मिररः नेपालीमे इ कहावत बड़ प्रचलित छैक एकर तात्पर्य इ जे लूटिकऽ लाएल धन अर्थात बिना मेहनति के आएल पैसा अनावश्यको काजमे खर्च कऽ लैत अछि। एखन नेपालमे जनताक तीरल जे टैक्स छैक तकर सार्थक खर्च नहि भ रहल छैक, लूटक धन जकाँ बन्दर बाँट कएल जा रहल छैक। एकहि दिन मे सक्षम लोक सब के नाम मे विभिन्न बहानाक मादे डेढ करोड़ रूपैया लुटा देल गेलै। एहन मे धन्यवादक पात्र छथि पँचायत कालीन भूतपूर्व परराष्ट्रमन्त्री रमेशनाथ पाण्डेकें जे ५ लाख टका लेबऽ स इनकार कऽ देलखिन।
    एक तरफ एहनलूट मचल छैक त दोसर तरफ भूकम्प पीड़ितक हेतु एक मुष्ट अनुदानक दू लाख टका देल जाए से अड़ान रखैत नेपाली काँग्रेस पार्टी सँसद अवरूद्ध कऽ रहल छैक, सत्ता पक्ष कार्यविधि नियमावलीकें दुहाइ दैत से करब अस्वीकार क रहल छैक। डेढ़ करोड़ भाग बन्डा करऽमे कोनो अवरोध नहि मुदा जकरा हेतु सहयोग राशि सब आएल छैक ताहि भूकम्प पीड़ित सबकें देबाक हेतु नियम निर्देशिका बाधक भ रहल छैक। एतबे नहि भूतपूर्व विशिष्ट पदाधिकारी लोकनिकें आजीवन यथेष्ट सेवा सुविधा देबाक हेतु बुद्धिबधिया करैत सब नियम कानून मिलाओल जा रहल छैक, मुदा वास्तविक पीड़ित जन समुदाय जकरा अन्नकें आभावमे छाक टारब कठिन भ रहल छैक तकरा सहयोग करबाक हेतु सरकारक बिल्कुले अग्रसरता नहि हएब के की कहबै?
    विनासकारी भूकम्पकें आब १४ महिना बीत गेलै अस्थाइ पाल टहरा बना कऽ ओहिमे आश्रय लेने लोक सबहक व्यथा कथा आ दैनिक जीवन यापनक विवरण बड कारूणिक छैक। सरकारी सहयोगक बाट तकैत-तकैत निराश भऽ कऽ जेना-तेना अपन अपन हैसियत अनुसार घर निर्माण प्रारम्भ कऽ नेने अछि। लगभग आधा काज सम्पनन भ गेल छैक, तहन आब सरकारक तरफ स ओहि क्षेत्र मे नमूना बस्तीक अवधारणा प्रस्तुत करैत तदनुरूपे घर निर्माण करबाक हएत से अनिवार्य रूपे पालन करबाक हेतु दबाब देल जा रहल छैक। आब लोक ओहि आँशिक रूपे तैयार होइत जा रहल घरकें तोड़त की छोड़त से असमन्जस त छैके घाव पर सरकार नूने छीट रहल अछि से धारणा लोककें भऽ रहल छैक।
    एकर अतिरिक्त प्राकृतिक आपदाक सेहो ओर अन्त नहि लागि रहल छैक। आषाढ १२ गतेक कान्तिपुर दैनिक मे आएल खबर अनुसार अंतरराष्ट्रीय एकीकृत पर्वतीयविकास केन्द्रक विशेषज्ञक टोली सबहक अध्ययन अनुसार भूकम्प स दुष्प्रभावित पाँच जिलाकें डेढ लाख घरसब भूस्खलन सं पूर्ण जोखिममे छैक जे कखनो कोनो अप्रिय दुर्घटना घटित भ सकैछ। लेकिन सरकारक गतिविधि स बुझाइत छैक जे जहन सब घर मटियामेट भऽ जएतै तहन सरकार सहयोगक भिक्षाटनक हेतु जगताह तावत सिँहदरबार मे राष्ट्रीयताकें मरहम पट्टी करैत रहताह। आ पीडित लोक ‘दैवो दुर्बल घातकः’ पढैत सन्तोष करताह।

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