आखिर राज्यमे मैथिलीकें कहिया भेटत उचित स्थान?

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    दिल्ली-मिथिला मिररः मैथिली भाषा कें अष्टम अनुसूची में शामिल भेना एक दशक सं बेसी भय गेल मुदा राजकीय स्तर पर एखनो धरि मैथिली कें उचित सम्मान नहि भेट सकलैक अछि। बेर-बेर विभिन्न सरकार द्वारा राज्य में मैथिली कें उपेक्षित रखवाक क्रम निरंतर जारी अछि। पहिने कांग्रेसक सरकारमे पूर्व मुख्यमंत्री डाॅ. जगन्नाथ मिश्र द्वारा मैथिलीक जगह पर उर्दू कें बिहार मे द्वितीय भाषाक दर्जा देल गेल, हो हल्ला भेलाक बाद दलील देल गेल कि चूंकि मैथिली एखन आठम अनुसूची मे शामिल नहि भेल अछि ताहि लेल एकरा कामकाजी भाषा नहि बनाओल जा सकैत अछि। कांग्रेसक सरकार गेलाक बाद राज्य मे जनता दलक सरकार बनल आ लालू प्रसाद यादव बिहारक सिंहासन पर विराजित भेलथि मुदा पाटलिपुत्रक कुर्सी पर बैसलाक तुरंत बाद मैथिलीक प्रति ओ टूटी पड़लथि।

    पूर्व प्रधानमंत्री आ मैथिलीक लेल युग पुरूष अटल बिहारी वाजपेयी जी’क द्वारा मैथिली कें आठम अनुसूची में शामिल केलाक बाद मैथिलीक भविष्य किछु उज्जवल देखना जाय लागल मुदा लालू प्रसाद यादवक कृपा सं मैथिली कें बिहार लोक सेवा आयोग में सं हटा देल गेल। मुदा माननीय पटना उच्च न्यायालय आ भारतीय जनता पार्टीक किछु नेताक संघर्ष सं पुनः मैथिली कें बिहार लोक सेवा आयोग में शामिल कैल गेल। राज्य मे फेर एक बेर सरकार बदलल आ अति महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्रीक रूप मे ओहि समय नीतीश कुमार कुर्सी पर बैसलैत मुदा हुनकर कृत त कहियो गंगाक उत्तर अर्थात मिथिला मे नज़रिये नहि आयल। सुशासन बाबूक नाम सं प्रसिद्ध नीतीश कुमार कार्य गया, नालंदा आ पटना तक सिमैट कय रहि गेलनि आ मैथिलीक संग जतेक उपेक्षा कय सकैत छलथि ओहि मे ओहो कोनो कटौति नहि कैलनि। प्राथमिक स्तर पर मिथिला क्षेत्र मे मैथिली मे शिक्षा देवाक लेल नीतीश कुमारक कान नौ साल मे नहि पटपटेलनि।
    प्राथमिक स्तर पर नीतीश कुमार हिन्दीक अलावे उर्दू आ बांग्ला शिक्षकक नियुक्तिक आदेश जारी कय देलनि मुदा मैथिलीक नाम पर एक बेर फेर सं हुनका अस्सी मोन पानि पडि़ गेलनि। अहि कहवा मे कनियो अतिश्योक्ति नहि जे जौं केंद्र सं राज्य स्तर पर मैथिलीक प्रति कोनो राजनीतिक पार्टी काज केलक त ओ अछि भारतीय जनता पार्टी। एकटा टटका फैसला में इलाहाबाद उच्च न्यायालय उत्तर प्रदेश में उर्दू के द्वितीय सरकारी भाषा घोषित कय देलक। आखिर अहि विषय पर बिहारक सरकार कहिया पहल करैत मैथिली कें उचित सम्मान देत से नहि जानि। आब ओ समय आबि गेल अछि जखन समस्त मैथिल कें मिथिलाक आत्म सम्मानक रक्षाक लेल एक जुट भय आंदोलन कय अपन हक़ लय आवाज बुलंद करौथ। मुदा दुखक बात ई जे अपना आपकें कथित विद्वानक संज्ञा देनिहार मैथिल समाज मात्र उतरा-चौली आ कुकुर कटौज करावा में विश्वास राखैत छथि बनिसपत सार्थक काज करवाक। कि आखिर कहियो मैथिल-मैथिली कें उचित सम्मान दियेवा में सफल हेतथि, ई अपना आप मे एकटा यक्ष प्रश्न सं कम नहि अछि?
     फोटो सभारः अमित आंनद

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