बिहारक लचर शिक्षा व्यवस्था कें नरेन्द्र मोदी आ गुजरात सं जोड़ब दुर्भाग्यपूर्ण

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    दिल्ली-मिथिला मिररः अचानक सोशल मीडिया पर एकटा मैथिल पत्रकारक पोस्ट पर नजैर पड़ैत अछि, पोस्ट बिहारमे इंटरमीडियटक विज्ञान एवं कला संकाय मे राज्य स्तर पर टॉप केनिहार सौरभ श्रेष्ठ आ रूबीक संदर्भमे मीडियाक साक्षात्कार पर गुजरात सं तुलना कैल गेल छल। पोस्टक भाव एहन छल जे बिहारमे त विद्याथी फेल केलक अछि मुदा गुजरात मे त शिक्षक फेल कय गेल छल। उक्त पंक्तिमे एकटा टीवी चैनलक रिपोर्टक संदर्भ दैत लिखल गेल अछि जे फल्लाठाम यानि कि गुजरातक शिक्षककें जोड़-घटाव तकमे दिक्कत होइत छन्हि।
    उक्त पत्रकारक बात कें मानैत हमहूं अहि बात पर सहमति दैत छी जे अहि मे कोनो दुम्मैत नहि जे गुजरातक सब शिक्षक निपुण हेताह आ ओहिठामक छात्रमे बिहारक छात्र सन कोनो समस्या नहि हैत। मुदा बिहारक मे शिक्षाक फर्जीवाड़ा सं गुजरातक तुलना कियैक? अगर गुजरातमे शिक्षकक दक्षता आ निपुण्णता अभाव अछि त ओ गुजरातक सरकार आ ओहिठामक जनता समस्या थिक। मुदा इ कतए कें बात भेल जे जौं बिहारक मे एहन तरहक घटना सामने आएल त ओकरा गुजरात आ नरेन्द्र मोदी सं जोड़ि एकटा नव बहस आ कि मुद्दा कें भटकेवाक कार्य कैल जाए।
    आब अहिठाम अमुक पत्रकार महोदय कें कने अहि बात सं अवगत करायब बहुत आवश्यक भए जाइत अछि जे बिहारक तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादवक कार्यकालमे जे लोकनि मैट्रिक सहित अन्य परीक्षामे पास भेलाह हुनकर परीक्षाक प्राप्तांक की छलनि। ओहि डिग्री लए अमूक विद्यार्थी लोकनि कतौ नौकरी पेशामे कामयाब त नहि भेलाह उलटे वैश्विक स्तर पर बिहारक विद्यार्थी आ ओहिठामक शिक्षा व्यवस्थाकें प्रश्न चिन्ह लागए लागल। लालूक जमानाक रद्दी सन पड़ल डिग्रीकें तखन आओर बेसी जान भेटल जखन नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बनलाह।
    राजनीतिक पंडितक मानी त बिहारक वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बहुत बेसी कागचेष्टी नेता छथि आ कथित रूपसं जातिगत राजनीति आ जातिगत समीकरणकें एतेक नीक जेना बुझैत छथि जेकरा बूझव आन जनमानसक बसकेर बात नहि थिक। राजनीतिक विश्लेषक कहैत छथि जे बिहारमे एहन तरहक कहबी छैक जे कोइर-कुर्मी सागो खाए जीवन बिता लैत अछि मुदा शिक्षाक स्तरकें सदिखन उपर रखैत अछि। एहनमे नीतीश कुमार जखन गद्दी पर बैसलाह त ओहि समस्त कोइर-कुर्मी सहित अपन वोट बैंक कें सहज रूप सं बिना कोनो परीक्षा पास केने शिक्षक बना देलनि। नीतीशक एक निर्णय सं दू टा शिकार भए गेल। एक त अपन समुदायक रोजगारक प्रतिशत बहुत बेसी बढ़ि गेलनि त दोसर ओ समस्त शिक्षकगण नीतीश कुमारक खरीदल वोट बैंक भए गेलाह। हां, लालू-नीतीशक कुचक्रक परिणाम इ भेल जे बिहारक शिक्षा प्रणाली कम सं कम 5 दशक पाछू भए गेल।
    आब ओहि पत्रकार महोदय सहित संपूर्ण बिहारीक लेल जे आज तक केर साक्षात्कार पर प्रश्न चिन्ह लगा रहला अछि। श्रीमान अपने जौं ज़ी न्यूज़ केर वीडियोमे इ देखने हैव कि गुजरातमे ओहिठामक मास्टर लोकनि जोड़-घटाव तकमे फेल कए गेलाह त कम सं कम एक बेर अपनो गिरेवानमे झांकि देल लेल जाउ। अपने लोकनि एक बेर यूट्यूब पर जा ‘फनी इंगलिश टीचर इन बिहार टाइप करू’ ओहिकें बाद जे परिणाम अपने सोंझा आएत ओकरा देख लेल जाएब।
    यौ जी महाराज शिक्षा व्यवस्थामे खामि जतए कें सरकार आ शिक्षा प्रणालीमे हो ओहिकें विरूद्ध आवाज उठेवाक चाहि कि नहि कि अपने बिहार सं छी त ओहिठामक शिक्षा व्यवस्था पर उठल प्रश्न चिन्हकें अपने गुजरात आ नरेन्द्र मोदी सं मिलान कए देब। श्रीमान अपने त सरकारक रहमो करम पर चलि रहल छी, अपने जॉब सेहो राज्य सरकारक दफ्तरमे टिकल अछि, भ सकैत अछि मुख्यमंत्रीक कोष सं अपनेक बेटीक शिक्षाक लेल हजारो टकाक वजिफा भेटैत हो मुदा कने ओहि विद्यार्थीक विषयमे सोचू जे एखनो सरकारी स्कूल पर आश्रित छथि। जौं अपने सन व्यक्तित्व लोकनिक एहन विचार अछि त हमरा अहांक पत्रकारिता आ अहांक सोच पर तरस आबि रहल अछि।

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