सब दलक ‘दलित’ दौड़ !

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    समय कए हिसाब सं सियासत बदलइत अछि आओर ओई सियासतक कए हिसाब सं नायक सेहो बदइल जाइत अछि। ऐना लागेत अछि जे आइ दलितक मसीहा बाबासाहेब अंबेडकरक सब पार्टीक लेल जरूरत बइन गेल छथि। अंबेडकरक प्रति पिछला किछु साल सं अचानक सब दल कए प्यार उमड़ि पड़ल अछि। आब अंबेडकर पर मात्र मायावती आ बीएसपी कए हक नहि रहल, बीजेपी कए सेहो अछि, कांग्रेस कए सेहो आओर आब त समाजवादी पार्टी सेहो अहि मे पिछा नहि अछि। याद करू पिछला सालक अंबेडकर कए जयंती, जखन कांग्रेस हुनक जन्म स्थान मऊ सं जयंती मनेबाक शुरुआत केलक आ साल धरि मना कए 11 अप्रैल 2016 कए नागपुर मे एकर अंत केलक, ओतइ अहि बेर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मऊ सं बाबासाहेबक 125म जयंतीक शुरुआत केला आओर आब बीजेपी सेहो एकरा साल धरि मनेत। मतलब आइ कांग्रेस आओर बीजेपी सन पार्टी सेहो अंबेडकरक विरासत पर अपन हक जमाबइ मे जुटल अछि। जकर अंबेडकर आओर हुनकर विचार सं दूर-दूर तक कोनो रिश्ता नहि रहल।

    अंबेडकर आओर महात्मा गांधीक बीच दलितक उत्थान कए प्रश्न पर दुनु मे कतेक मतभेद छल इ सब जनइ अछि। जतय गांधी एकटा आस्थावान हिंदू छला, त ओतय अंबेदकर जाति व्यवस्थाक नाशक लेल प्रतिबद्ध छला आओर ओ अपन मृत्यु सं किछु दिन पहिले अपन हजारों अनुयायीक संग बौद्ध धर्म अपनेला। आब एहन आदमी कोनो हिंदुत्ववादी पार्टीक आदर्श पुरुष भ सकैत अछि, इ बात कियो सोइचो नहि सकैत छल। मुदा एखन बीजेपी इ देखेबा मे लागल अछि जे अंबेडकरक विरासत आओर हूनक जीवनक मूल्य कए प्रति बीजेपी स ज्यादा आओर कियो गंभीर नहि अछि। मुदा अहि बेचैनीक पीछा अंबेदकरक प्रति प्रेम या हुनक विचारधाराक प्रति निष्ठा नहि, बल्कि शुद्ध चुनावक गणित अछि।

    साल 2017 कए शुरुआत मे उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अछि आओर ओतय अंबेडकरवादक प्रबल प्रचारक मायावतीक बहुजन समाज पार्टी बाकीक सब पार्टीक लेल एकटा पइघ चुनौती छथि। भले अपन आचरण सं मायावती अंबेडकरक सिद्धांत पर नहि चलथि, मुदा हुनकर विरोधी सेहो इ मानइ अछि जे बसपाक संस्थापक आओर मायावतीक राजनीतिक गुरु कांशीराम आओर मायावतीक प्रयास सं दलित मे एकटा नब आत्मविश्वास आओर उत्साह जागल अछि। कांग्रेस कए मायावती सं इ खतरा अछि जे ओ कांग्रेसक दलित वोट कए अपना दिस नहि खीच लथि। पिछला तीन दशक मे कांग्रेसक दलित वोट मायावती दिस आओर मुस्लिम वोट मुलायम सिंहक समाजवादी पार्टीक दिस चलि गेल। जाहि कारण कहियो उत्तर प्रदेश मे राज करय वला कांग्रेस एखन तेसर-चारिम नंबरक पार्टी बइन कए रहि गेल। दोसर दिस दिल्ली आओर बिहार मे हारक बाद बीजेपीक लेल उत्तर प्रदेशक चुनाव जीवन-मरणक सवाल भ गेल अछि। ओकर कोशिश अछि जे दलित ओकरा अपन हमदर्द बुझे। ताहि खातिर ओ अंबेडकरक हिंदू धर्म आओर जातिप्रथाक आलोचनात्मक विचार कए अनदेखा क कए हुनका अपन प्रेरणास्रोत मे शामिल करय चाहैत अछि।

    आइ राहुल गांधी देश मे कोनो जवानक मौत मे देखाइथ या नहि देखाइथ मुदा कोनो दलितक मौत पर ओ अपन घड़ियाली नोर बहाबइत जरूर भेट जेता। मुदा राहुल शायद अहि सच सं दूर छाथि जे कांग्रेसक दस सालक सत्ताक दौर मे दलित पर उत्पीड़नक तीन लाख सं ज्यादा मामला दर्ज भेल। त ओतइ दोसर दिस पीएम मोदी सेहो अहि सच सं दूर छाथि जे हुनका सत्ता मे एलाक बाद मात्र 2014-2016 मे 50 हजार सं ज्यादा दलित पर उत्पीड़नक मामला देश भरि मे दर्ज केल गेल। आइयो दलितक सामाजिक स्थिति बेहद भयावह अछि। आइयो गांव सं एहन खबर आबइत रहइ अछि जे घोड़ा पर चढ़ि कए बारात निकालय पर दलितक हत्या क देल जाइत अछि, त कतउ वोट नहि देला पर दलितक बस्ती मे आगि लगा देल जाइत अछि। दलित महिलाक संग बलात्कार सेहो दलितक खिलाफ एकटा हथियारक जेना इस्तेमाल केल जाइत अछि। त कि मात्र ‘जय भीम’ क नारा लगेला सं देश मे हाशिये पर पड़ल दलित कहियो मुख्य धारा मे शामिल भ सकैत अछि  आओर कि ऐना मे साजिक बदलाव कए लय कए अंबेडकरक सपना कहियो पूरा भ सकत ?

    (इ लेखकक अपन विचार छन्हि आ अहि ब्लाॅग मे संपादकीय सहमतिक कोनो आवश्यकता नहि। पत्रकार सोनू झा वाइस आॅफ नेशन देहरादून मे कार्यरत्त छथि आ किछु मैगजीन आ वेब मीडियाक लेल स्वतंत्र रूप सं सेहो लिख रहला अछि)

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