अप्पन बड़द कुरहड़िए स नाथब “नेपाल संदर्भ”

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    सेंट लुइस (अमेरिका),मिथिला मिरर-काली कान्त झा ‘तृषित’: ई कहबी त रहबे करतै लेकिन एहन मनमौजी आइ के दिन मे सम्भव नहि छैक किएक त पशु के
    संरक्षण सम्बद्ध अधिकारकर्मी सभ दिने मे तरेगन देखा देतन्हि आ बाध्य भऽ कऽ नाथो गरदानी ढंगे सँ पहिराब पड़तन्हि. जहन जानवरो के उपर होबए बला अत्याचार सँ बचएबाक हेतु संसार हस्तक्षेप कऽसकैत छैक तहन मनुष्यक प्रसंग मे एहन दुर्व्यवहार करऽ बला के की हाल हएतै से सहजे बूझल जा सकैछ, मुदा एहि सब सँ नेपाल सरकार बेखबरे बुझाइत छथि. नेपालक जनसंख्या के आधा हिस्सा तिरस्कार स मुक्ति, बंचित अधिकारक प्राप्ति आ देश मे नागरिक भऽ कऽ सम्मान सहित बँचबाक हेतु शान्तिपूर्ण रूप मे आन्दोलनरत अछि.
    ज्ञातव्य जे अधिकार प्राप्तिक लड़ाइ मे इ आन्दोलन संसारे मे अभूतपूर्व कीर्तिमान बना चुकल अछि मुदा सरकारक हेतु भैंसीक आगा बीन वा गदहाक कान मे शहनाई जकाँ व्यर्थ भ रहल छैक, यद्यपि देखावटी नाटक त बहुत मंचन भ रहल छैक तकरे एकटा कड़ीक रूप मे नऽब सम्बिधान लिखएलै जाहि मे अन्तरिम सम्बिधान मे जे देलहो अधिकार छलै सेहो कुंठित कऽ देल गेलै तकर प्रतिकारक प्रसंग मे प्रहरीक गोली स जे शहीद भेल अछि ताहि मे अगर लापता सभ के जोड़ल जाय त करीब एक सय पहुँचऽ लागल छैक लेकिन सरकारक लेखे धन-सन ओ अपने आत्मरति मे मग्न छैक. सरकारक हिसाबे नेपालक नऽव सम्बिधान संसारे मे सर्वोत्तम छैक न भूतो न भविष्यति. जौं सही मे सर्वोत्तमे छलैक त एहि मे त्तकाले संशोधन किएक करए लागल छथि सेहो उटपटांगे. इ त तेहने बात भेलै जेना कोनो लड़की पर्णत: आदर्श पुरूष खोजि कऽ विवाह कएने होअए आ विवाहक बाद ओकरा सुधार लागल होअए.
    जौं आदर्श ताकि कऽ कएने छल त ओहि मे सुधारबाक गुन्जाईश कोना भेलै जौं सुधारब
    जरूरी भेलै त आदर्श कोना भेलै लेकिन सर्बज्ञ सम्बिधाननिर्माता सभ से मानऽ लेल तयार नहि छथि. देश विदेशक मानवाधिकारकर्मी सभ सरकारी दमन, उत्पीड़न रोकबाक हेतु ध्यानाकर्षण करा रहल छन्हि भारत यूरोपिएन युनियन लगायत अमेरिका समेत संबिधान मे सार्थक संशोधन करैत पीड़ित आ उपेक्षित बर्ग के प्रति तनाशाही रवैया नहि अपनएबाक हेतु संकेत दऽ रहल छन्हि आ सम्बिधानक अपूर्णता प्रति सेहो ध्यान आकृष्ट करा रहल छन्हि मुदा ताहि स त नेपाल सरकार के अओर कबछुआ लागि गेल छैक मन्त्री प्रधानमन्त्रीतक अनर्गल प्रलाप मे लागि पड़ल छथि जे इ हमर आन्तरिक मामला अछि हम अपने समाधान करब किंवा हम अपन बड़द कुरहड़िए स नाथब हमरा केओ किएक कहत. एहि तरहक मिथ्या अहंकार एवं विष बमन करैत सरकारी रवैया देखला स इ बात स्पष्ट भ रहल छैक सरकार एहि बात पर उतारू भ गेल छै. हम तो डूबेंगे सनम साथ मे देश को भी ले डूबेंगे आ गला मे देशघाती राष्ट्रीयता का पट्टा लगा लेंगे.

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