‎वाह रे जनता, वाह सरकार-गीतकार मनीष झा द्वारा लिखल इ गीत

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    सउँसे पसरि रहल अछि डेग डेग पर अत्याचार अपने धुन में सब अछि मातल वाह रे जनता ! वाह सरकार!

    नगर नगर में परै अछि डाका जाऊ दिल्ली वा कोनो ईलाका अछि मचौने सब हाहाकार वाह रे जनता ! वाह सरकार ! कोट-कचहरी वा हो दफ्तर पैरवी-घूस पर चर्चा सभतरि सब ठाम बैसल दुर्जन-पैकार वाह रे जनता ! वाह सरकार !

    तूर-तेल लेने कान में अफसर गरीबक शोणित चुसै अछि खच्चर करय कियो नहिं सोच – विचार वाह रे जनता ! वाह सरकार ! वोट काल में नेता जी आबथि हाथ जोड़ि विकासक गान ओ गाबथि विजयोपरांत भ’ जाई छथि पार वाह रे जनता ! वाह सरकार !

    सुनू यौ बंधु आहाँ विचारू जुनि दुष्टक आहाँ पैर पखारू नहिं त’ घर-घर होयत राक्षसक अवतार वाह रे जनता ! वाह सरकार ! करियौ जल्दी सोच – विचार वाह रे जनता ! वाह सरकार ! वाह रे जनता ! वाह सरकार ! मतदान करू संग सोचि -विचार वाह रे जनता ! वाह सरकार !

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