परिचय प्रसून: गायन विधाक परम पुनीता स्वरसाधिका  “रंजना झा ” 

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    दिल्ली,मिथिला मिरर- शिव कुमार झा टिल्लू: गीत -संगीत अनुप्राणित जीवन शैलीक प्राण मानल जाइछ. यति आ नियतिक क्रम व्यतिक्रमक मध्य शाश्वत चेतनामे उर्जाक संचार आ जीवनक सम्यक गति हेतु स्वस्थ मनोरंजन अत्यावश्यक होइछ. सरिपहुँ कहल गेल अछि. सिनेह बिनु नहि अर्चना विवेक बिनु नहि अर्पणा संगीत बिनु नहि साधना. चलंत जीवनमे भाषाक अस्तित्व मंडरा रहल अछि. छद्म लोकप्रियताक आड़िमे भौतिक जुआरिकेँ विश्रांत करबाक लेल गीत – संगीतक गंभीर अस्तित्वकेँ एहि विधासं जुड़ल बहुत रास प्रवीण लोक ताख पर राखि रहल छथि. जौं हुनक एहि अनर्गल कर्मक स्वस्थ आलोचना कएल जाइत छन्हि त’ प्रत्यालोचनामे मात्र दुटप्पी नोर जे गंभीर गीतसंगीत आ गायनकेँ वर्तमान पिरही अस्वीकार क’ रहल अछि . चेतनशील भ’ क’ सोचलासँ एहि तरहक तर्क सभ अर्थेँ निरर्थक लगैछ. आन भाषामे जे होइत हुअए बरु किओ करेजक कोढ़सँ बीड़ी जराक’ लोकप्रियता प्राप्त करैत होथि वा किओ निरर्थक गीत पर क्षणिक कोलबेरी कोलबेरीक’ बिनु अर्थ बुझने मूड़ी डोलबैत होथि , मुदा मैथिलीक संग स्थिति विलग अछि.

    रवींद्र -महेंद्र ,शशिकांत -सुधाकांत, तिजौड़ी, सरस -रमेश, नवल -नन्द, चंद्रमणिक बिनु साजक वाजक स्वर सुनबाक अभ्यासी मैथिल एखनहुँ महाकविक गीतकेँ निष्परान भ’ ह्रदयसँ लगाक’ कोनो समारोहमे अंत धरि बैसल रहैत छथि. एतेक धरि आश अवश्य रहैत छनि जे मंच पर गायक -गायिका नहि मैथिलीक प्रति अर्पित सुकोमल कंठक साधक साधिका होथि. एकर प्रत्यक्ष प्रमाणजे एखनहुँ हमर मंच पर सर्वाधिक जनप्रिय हमर अपन माटिक सुगंधक गीत रहैछ. वर्तमान मैथिलीक प्रवीण-प्रवीणा गायन मण्डलीमे अपन कोमल उरक संग संग साधनाक उमंग समागमकेँ हियासँ लगाक’ अपन वयनाक आशुत्वकेँ राष्ट्रक विविध मंचसँ कोकिला जकाँ परिलक्षित क’ रहलीहें हमर अपन माटिक तनया. “रंजना झा.

    रंजना झाक जन्म २५ नवम्बर सन १९७७ कें वर्तमान अररिया जिलाक ” देवीगंज ” नाओंक गाँवमे भेलनि. हिनक पाणिग्रहण संस्कार लगमा सहरसा गाममे भेल छन्हि. हिनक पिता श्री भागवत मिश्र वियोगीक संग संग माता श्रीमती शांति मिश्र संगीतक स्थापित साधक -साधिका छथि . सरिपहुँ सहजजे सरस्वतीक एहि वागीशाकें संगीतक साधिका बनबाक अवसरि विरासतेमे भेंटलनि. तत्पश्चात स्वर्गीय रामावतार सहनी आ श्री योगेन्द्र भारतीक सानिध्यमे संगीतक शिक्षा -दीक्षा ग्रहण कयलनि. २-३ वर्ख पूर्व भारतक महान संगीतविशारद पद्मविभूषण श्री किशोरी अमोनकर जीक स्नेहाशीष भेँटब प्रारम्भ भेलनि , मुदा नारीत्वक दायित्वक अनुपालन हेतु ई सुअवसरि अधगेड़ेसँ छूटि गेलनि . रंजना जी भातीय शास्त्रीय संगीतमे १९९९ मे स्नातक कयलाक पश्चात २०१२ मे मगध महिला कॉलेज ( पटना विश्वविद्यालय ) सँ एहि विधाक सुप्रतिष्ठित ” परस्नातक ” क प्रमाणपत्र प्राप्त कयलीह. एहि मध्य सन १९९४ ईस्वीमे प्रयाग संगीत समिति इलाहाबादसँ शास्त्रीय गायनमे ” संगीत प्रभाकर” उपाधिसँ, सन २००७ मे प्रयाग संगीत समिति इलाहाबादसँ तबला वादनमे ” संगीत प्रभाकर ” उपाधिसँ आ सन २०१० ईस्वीमे प्राचीन कला केंद्र चंडीगढ़सँ ” संगीत-भास्कर ” उपाधिसँ विभूषित भेलीहें. रंजना जी भारत सरकारक संगीत आ नाट्य प्रभागक संभागमे आकाशवाणी पटनाक उच्च श्रेणीक बी ग्रेड गायिका ( गजल , भजन , ठुमरी , दादरा , सूफी , अर्द्ध शास्त्रीय अन्यादि ) छथि.

    महान दार्शनिक उदयनाचार्यक अनमोल माटि करियनसँ ल’ क’ भारती-मण्डनक भूमिकें लपटैत समग्र मिथिलाक विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमक ई सर्वाधिक लोकप्रिय गायिका प्रमाणित भ’ रहलीहें . अपन देशकोसक संग -संग भारत भूमिक समग्र प्रवास अधिवासमे प्रति वर्ख होम’वला ” विद्यापति स्मृति पर्व समारोह ” हिनक स्वरक तानक बिनु सून जकाँ लगैछ . अपन बिहारक संग संग भारतवर्षक विविध नगर-महानगरक मंचसँ ” बिहार दिवसक संग संग, कोशी महोत्सव , अंग महोत्सवक संगहि बिहारक विविध महोत्सवमे ” हिनक गायन अपन भाषा संस्कृतिक सुगंधकें नवल अर्थमे सुवासित करबाक संवाहक बनल . भारतक माननीय राष्ट्रपतिक स्वागत कार्यक्रम पटनामे सन २०१२ मे हिनक गायन बहुत उत्कृष्ट रहल . अखिल भारतीय कला साधक संगम १९९८ ( नागपुर ) सँ अपन राष्ट्रीय पहिचान बनब’ वाली रंजना जीकेँ बिहार सरकार द्वारा प्रतिष्ठित ” पद्मश्री विंध्यवासिनी देवी सम्मान २०१२ ” , मिथिला विभूति सम्मान ( विद्यापति सेवा संस्थान , दरिभंगा २०१५ ) देल गेल छन्हि . एकर अतिरिक्त बहुत रास संस्था हिनका सम्मानित क’ चुकल छन्हि . हिन्दी आ संस्कृतक बहुत रास गायन विधाक सीडी आ कैसेट हिनक स्वरमे रास जनप्रिय प्रमाणित भेलनि आ भ’ रहल छन्हि . मैथिलीमे महाकवि विद्यापतिक मधुर भक्तिमय श्रृंगार गीतक सीडी ” चानन ” लोकप्रियताक कीर्तिमान स्थापित केलक . एकर संग संग सुधा फाउंडेशनसँ हिनक स्वरमे पारम्परिक मैथिली विवाह गीतक संकलन रास चर्चित भ’ रहल छन्हि. पद्मश्री विंध्यवासिनी देवी आ पद्मश्री शारदा सिन्हा जीकें भेंटल ” पद्म पराग ” रंजना जीक आँचरमे सुवासित होयत. एहि कामनाक संग.

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