डाॅ. चंद्रमणिक गीतक विषय मे शिव कुमार झा टिल्लूक विश्लेषण

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    अभिनन्दन गीत डॉ चंद्रमणि झा, मंगलमय दिन आजु हे पाहुन छथि आयल धन धन जागल भाग हे मन कमल फुलायल.

    मंगल घट सँ द्वारि सजाओल कंचन दीप वारि हम लाओल, गाँथल हार गुलाब हे हिनका पहिराओल. मंगलमय दिन आजु हे पाहुन छथि आयल. कर खाली बेसी अभिलाषा दूबि धान पर अगबे आशा, मान बढ़ाबय पाग हे हिनका सिर राखल. मंगलमय दिन आजु हे पाहुन छथि आयल.

    धन मे धन भावहि टा सम्बल सुभग सिनेह मनहि मन केवल घर केर अनुपम साग हे भोजन मे साजल मंगलमय दिन आजु हे पाहुन छथि आयल.

    भाल तिलक दधि पान मखाने एतबहि सँ स्वागत सम्माने चंद्रमणिक सौभाग्य हे शुभ लगन तुलायल मंगलमय दिन आजु हे पाहुन छथि आयल.

    मैथिली नवगीत विधाक एकटा सशक्त हस्ताक्षर डॉ चंद्रमणि झा मैथिली गीत- गायन मंचक चर्चित नाओं छथि . हिनक बहुत रास गीत मैथिलीक मानस पटल पर ध्रुवतारा जकाँ चमकि रहल “राम छू रहमान छू. सन तिलक प्रथा पर गंभीर विश्लेषणात्मक प्रगीत काव्य सँ ल’ क’ मंचक आवश्यकताक अनुकूल रचना “पिया डांड़े पर घैला ” आ “‘ खो रे मंगला पड़ल र’ह. सन गीतक रचनाकार चंद्रमणि पाहुनक लेल अभिनन्दन गीत ” मंगलमय दिन आजु हे ” लिखि प्रायः सभ समारोह वा लगन मे उपस्थित मैथिलक मोनमे रसि -वसि गेल छथि . १९८२-१९८३ मे रचित हिनक ई रचना मिथिलाक प्रतिनिधि अभिनन्दन गीत बनि गेल अछि .चर्चित गायक हरिनाथ झा सँ ल’ क’ मैथिली गायकीक नवांकुर प्रतिभा सुश्री स्नेहा झा धरिक गायक / गायिका लोकनि हिनक एहि पद्य कें गबैत रहैत छथि .

    एहि परिपेक्ष्य मे दुःखद जे एहि गीतक अंतिम अंतरा कियो नहि गबैत छथि . एकर दुःख रचनाकार हमरो सँ एहि वर्ख १७ फ़रवरी कें व्यक्त कयलनि , जखन हम अपन भतीजीक विवाहक अवसर पर पाहुनक स्वागत मे स्वयं गेबाक लेल फ़ोन पर हिनका सँ ई गीत लिखा रहल छलहुँ . अंतिम पद मे हिनक नाम छन्हि . गायक /गायिका त’ गीत गाबि एकरा सँ किछु उपार्जन करबाक आश रखैत छथि मुदा मैथिली मे गीतकार जौं रोजी रोटीक लेल लिखत त’ भुखले मरि जायत. हमहूँ गीत लिखैत छी . एक गीतकारक आश त’ एतेक अवश्य होइछ जे गायक / गायिका लोकनि हुनकर गीत पूरा गाबथि आ मंच सँ ल’ क’ कैसेट ,सी . डी. आ एलबम धरि गीतकारक नाम क उल्लेख करथि. ( आभार शिव कुमार झा टिल्लू )

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