सृजन शेखरक गीत, गुदड़ी पहिरने हमर माए

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    ममता भरल अछि आँचर तोहर

    शीतल सिनेहक छाँह तोहर

    दुख बड़ सहलें तप में जरलें

    कखनो ने मुस्की मलिन तोहर

    गुदड़ी पहिरने हमर माए

    हम कि देबौ द कि सकबौ

    अमृत सिनेहक करजा तोहर

    जिनगी भरि तकबौ टुक-टुक तकबौ

    सदिखन दुलार लए मुँह तोहर

    माँ तू दुलारक अनंत सागर

    शीतल सिनेहक छाँह तोहर

    किए गुदड़ी पहिरने हमर माए

    दुनियाँ बदललै हमहूँ बदललहूँ

    बदलल नै कखनो सुभाव तोहर

    सदिखन हम तोरा दुबरे लगलियौ

    सदिखन तोरा चिंता हमरे पर

    तोरा लेल गुण अवगुण सबटा हमर

    शीतल सिनेहक छाँह तोहर

    किए गुदड़ी पहिरने हमर माए

    बिसरि कोना गेलौं, दूर भ गेलौं

    केलौं करेजा कोना पाथर

    बूझि ने पेलौं जे कि हम हेरेलौं

    जखन लागल मुक्का करेज पर

    सातों जनम  तोरे हम पूजब

    तोहर चरणधूलि हमर माथ पर

    शीतल सिनेहक छाँह तोहर

    किए गुदड़ी पहिरने हमर माए

    माँ हमर मिथिला,माए भाषा मैथिली

    जननी-माए जननी तीनूक आँखि दुख

    नोर भरल

    कहिया तक कानत गुदड़ी पहिड़त

    जननी मोर जननी

    कहिया तक कानत गुदड़ी पहिड़त

    शीतल सिनेहक छाँह तोहर

    किए गुदड़ी पहिरने हमर माए

    आउ सब भाय मिल संकल्प लिय जे आोहि दिन तक हाथ स हाथ जोरि संघर्ष करब, जाहि दिन तक माए-मिथिला-मैथिली के सब नोर पोछा ने जाएत आ गुदड़ी के स्थान रेशम नै ल लेत। आउ राजनीति स उपर उठू,सब घृणा आ भेदभाव के बिसरि क हाथ स हाथ जोड़ि संगे मिल काज करू। माएक करजा बड़ भारी अछि सबहक ऊपर।

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