पुतुल, रविन्द्र झा संग मिथिला मिररक खास बातचीत

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    हालहिं मे संपन्न भेल मुंम्बई के उपनगर वसई-विरार‘क महानगरपालिका‘क चुनाव के वार्ड न.-24 सं एतिहासिक जीत दर्ज कयनिहरि पुतुल रविन्द्र झा जे पहिल मैथिलानी हेवाक गौरव प्राप्त कयलनि। आजुक अंक मे हमरा लोकनिक बीच पाहुन बनि उपस्थित छथि तऽ बर बेस पढल जाउ पुतुल रविन्द्र झा संग भेल मिथिला मिररक प्रतिनिधि राम नरेश शर्मा बातचीतक अंश-
    पुतुल जी, रविन्द्र जी दुनु गोटे के नमस्कार
    मिथिला मिरर मे अपने लोकनिक बहुत-बहुत स्वागत अछि।
    उ.-आहुंके नमस्कार
    प्र.-ओना अपनेक परिचयक कोनो मोहताज नहि, तैयो चाहब जे मिथिलावासी के बीच अपन छोट सन परिचय देल जाउ?
    उ.-हमर नाम रविन्द्र झा भेल, हमर गाम दरभंगा जिला मे केवटी प्रखंडक अन्तर्गत दड़िमा भेल हम ओहिठामक रहयवला छी।
    प्र.-अपनेक बचपन कोना बितल आ शिक्षा-दीक्षा कोना प्राप्त कयलों?
    उ.-हमर पिताजी गृहस्थ छलैथ, जमीन-जाल त छलैन्हे मुदा आमदनी तेहन सन नहि छल तैयो हम बी.काॅम.(वाणिज्य) सं हम प्रतिष्ठा प्राप्त कय सकलौ ओहिके बाद किछु दिन धरि गामे मे मेडिकल रिप्रजेन्टेटिव के काज कयलौं।
    प्र.-अपने सर्वप्रथम मुंम्बई कहिया अयलों आ मुंम्बई मे एहि मुकाम धरि पहुंचवाक लेल अपनेक कोन-कोन समस्याक सामना करैय पड़ल?
    उ.-हम मुंम्बई सर्वप्रथम 21 दिसंबर 1996 मे अयलों, ओहो नोकरी करबाक लेल नहि आयल रहि ओ तऽ बहिन के मुंम्बई छोड़बाक लेल आयल छलौं। एकाएक मोन मे इ भेल जे मुंम्बई मे लोक कष्ट कटै छै त सुख भेटै छैक। एकदिन हम अपन छोट भाई अनूप के कहलियैन रे बौआ हमरा नोकरी करबाक अहि तो ओ कहलक जे भैया आहां नोकरी करबय आहांके घर पर की कमी अहि अहां के पैर गाम मे राजदूत सं उतरैते नहि छल तथापि ओ नोकरी लगेबाक लेल तैयार भेल एहि तरहें हमर पहिल नोकरी 5000 हजार टका सं शुरू कयलों। अक्टूबर 1998 मे हम विरार आबि गेलौं जखन हम विरार आयलों त अहिठाम पानि के सुविधा नहि छल हमरा सभके लगभग आधा किमी. सं पानि आनैय पड़ै छल जखन अभाव भेल त अभाव के दूर करबाक लेल हम जतन हम करय लागलौं। घर बनेलौं त नोकरी छुटि गेल तथापि दू मास धरि घर बैसला के बाद हमरा नोकरी भेटल जाहिमे अपन कर्मक बदौलत आइ एहि मोकाम पर पहुंचलौं। हमरा गाम मे बिजली छल मुदा हम एतय 6 महीना धरि डिबियामे जिनगी गुजारलौं। एहि समस्या के सं कोना निदान होयत ताहि लेल लोक सभसं परिचय-पात्र भेनाइ जरूरी छल हम एकटा रामायण खरीदलों आ कहियो हिनका घर-कहियो हुनका घर एकाएकी कय कऽ रामायण पाठ करबाबय लागलों एहि सं लोक सभसं परिचय सेहो भेल ओकरा बाद हमसभ संगठन बनेलों आ लागि परलों सामाजिक काजमे जेकर परिणाम अपने सभहक सोझा अहि।
    प्र.-एहि तरहक समस्या के सामना करैत अपने आगा बढ़ैत रहलौ त एहिमे पुतुल जी के कि कोना सहयोग भेटल ?
    उ.-हमर विवाह 25 फरवरी 1989 मे भेल छल ओहि समय मे हमर शिक्षा-दीक्षा हिनक (पुतुल जी) कलक्ता सं भेल छलैन्ह इ शहरी हम गामक लोक तथापि एखन धरि हमसंगे रहि रहल छी आ हमरा सामाजिक काज मे व्यस्ता के कारणे इ परिवाक सभटा काजक जिम्मेदारी उठबैत रहलि कहियो मुह नहि मलिन केलिह। हमर मात्र काम छल कमा कय पैसा देनाई आ सामाजिक काज मे संलिप्त रहनाई।
    प्र.-पुतुल जी, हम चाहब जे आहां अपन परिचय सेहो स्वंय मिथिलावासी के सोझा राखि?
    उ.-जी, हमर घर मधुबनी जिला के बेनीपट्टी के अन्तर्गत एकटा गाम छैक दामोदरपुर ओतय के हम मूल निवासी छी। हमर पिताजी के नाम राधाकृष्ण मिश्र छन्हि। हमर शिक्षा-दीक्षा कलक्ते मे भेल हम कलक्ता सं मैट्रिक पास केलौं ओहिके बाद त हमर विवाहे भ गेल।
    प्र.-एकटा मैथिल महिला के लेल चुनाव लड़नाई बड कठिन बुझना जाय छैक त एहिमे अपनेक परिवारक सहयोग केहन रहल आ चुनाव लड़बाक फैसला रविन्द्र जी के छलन्हि कि आहां के स्वंयगक फैसला छल?
    उ.-हिनके इच्छा छलैन्हि, हमरा लेल हिनकर इच्छा अपन इच्छा छल। हम इ सोचय छी जे जाहि सं हमर परिवार खुश रहत हम ओ काज करब। परिवार सं हमरा भरपूर सहयोग भेटल हुनक सभहक सहयोग सं आइ अपनेक सोझा बैसल छी।
    प्र.-मैथिल समाज खास कय पुरूष प्रधान समाज मानल जायत छैक ओहिठाम स्त्रीगण के राजनीतिक व सामाजिक कार्य करबाक लेल बहुत तरहक समस्याक सामना करय पड़ै छै कि आहंु के एहि तरह समस्या के सामना करय परल?
    उ.-रविन्द्र जी-यदि घरमे समस्या होई छैक त बाहरो समस्या होई छैक मुदा हमरा अपन परिवार सं दोस्त-महिम सं बहुत सहयोग भेटल।
    प्र.-पुतुल जी मुंम्बई के विरार नगरपालिका चुनाव मे जीत दर्ज करैयवाली पहिल मैथिलानी हेबाक गौरव प्राप्ति केलिह आब अपने मैथिल समाज वा एहिठाम रहैयवला समाज के लेल कोन काज करबाक प्राथमिकता देबैय?
    उ.-इ मात्र विरार नगरपालिका मे नहि अपितु संपूर्ण महाराष्ट्र मे मिथिला के बेटी चुनाव लड़लै विजय प्राप्त केलैथ। हमरा एहिठाम रहयवला समाज सं भरपूर सहयोग भेटल आब हमरा उपर कर्जा बैढि गेल हम मोन सं कहै छी इ कर्जा हुनका सभ के काज कय के सुइद सहित वापिस करबैन।
    प्र.-संपूर्ण महाराष्ट्र मे रहनिहार मैथिल अलग-अलग रहि काज करै छैथ कि हुनका सभके एकठाम आनबाक कोनो योजना अहि?
    उ.-अपन समाज मे कने एकजुटता के अभाव देखना गेलैये मुदा हमरा जे जीत भेटल ताहिमे मे बिना एकजुटता के संभव नहि छल। हमर विरर मे काज कय रहल छी केयो आरगोटे अन्यठाम काज कऽ छथिन इ नीक गप मुदा हमर प्रयास रहत जे कोना एहन अवसर व आयोजन होई जाहिठाम संपूर्ण मैथिल भाई, संस्था आदि एकठाम एकत्रित भऽ सकैथ।
    प्रश्न- पुतुल जी अपनेक जनम,लालन -पालन आ शिक्षा-दिक्षा सभ शहरी परिवेश मे भेल तत्पश्चात मैथिली बाजब आ मैथिली सं एतेक स्नेहक राज की?
    उ.-हमर जनम भलहिं कोलकाता मे भेेल मुदा हमर परिवार त मूलतयः मिथिला सं छल ओकरा बाद विवाहो मिथिला मे भेल हमर सौभग्यशाली छी जे मैथिली सन मधुर भाषा सिखबा आ बजबाके मौका भेटल। आब त हमर बच्चो सभ मुंम्बई रहितो निक मैथिली बाजै छथि। यदि नेना केे निक शिक्षा-भेटतनि त ओ कोनो भाषा सीख सकै छथि आ एहि सभमे माय-बाप के बड पैघ योगदान होईत छैक।
    प्रश्न- पुतुल जी, अन्त मे अपने मैथिल जनता खास कय महिला लेल कि संदेश देबय चाहबैन?
    उ.-हम हुनका सभ सं यैह कहय चाहबैन जे एम्हर के गप ओम्हर आ ओम्हरक गप एम्हर पर बेसी ध्यान नहि दय अपन काज मे निरंतर लागल रहु ज्यों अपने सभ निक काज करैत रहबै त ओकर परिणामों नीक भेटबे टा करतै। हमर संपूर्ण परिवार मुंम्बई मे रहै छथि आ हमर बच्चा सभ एतय पढै़-लिखै छथि तैयो हमरा घर मे भाषा मैथिली अछि हमरा गर्व अछि जे हम मैथिली भाषी छी। इ बात त जगजाहिर छैक जे माय-बाप अपन बच्चा सं बाल्यावस्था मे जाहि भाषा मे संवाद करथिन बच्चा सहए भाषा सिखथिन। 
    दुनु गोटे के एतेक महत्वपूर्ण समय देबाक लेल बहुत-बहुत धन्यवाद!
    आजुक अंक बस एतबे आगु अंग एहिना फेर कोनो नव पाहुनक संग भेंटघांट आयब ता धरिके लेल 
    नमस्कार…….
     

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