शेक्सपीयरक अंग्रेजी नाटक मे प्रकाशक मैथिली रंग

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    दिल्ली,मिथिला मिरर-राहुल कुमार रायः विलियम शेक्सपीयर द्वारा रचित विश्कक सब सं बेसी चर्चित नाटक मे सं एक रोमियो-जूलियटक मंचन दुनियाक प्रायः सब भाषा मे भ चुकल अछि आ दुनिया भैर मे अहि नाटक कें कखनो कहानीक रूप मे त कखनो उपन्यासक माध्यम सं त कखनो विश्व भरिक विभन्न प्रतिष्ठित रंगमंचक मादे देखल जा चुकल अछि मुदा सोमदिन अर्थात 15 दिसंबर 2014क मिथिला-मैथिली रेमियो-जूलियटक एकटा नव रंग देखलक। मैथिली नाट्य संस्थाक प्रतिष्ठित नाम मे सं एक मैलोरंग ओ ओहि कें निर्देशक प्रकाश झा द्वारा सोमदिन दिल्ली स्थित श्रीराम सेंटर मे रोमियो-जूलियटक मैथिली रूपांतरण ‘‘चान-चकोर’’क सफल मंचन कैल गेल। निश्चित रूपहि मैथिली मे रोमियो-जुलियटक रूपांतरण क ओकरा मंचस्थ केनाई अपना आप मे एकटा भीरहगर काज छल मुदा लगातार मैथिली रंगमंच पर एक कें बाद एक प्रयोग केनिहार रंगकर्मी ओ मैलोरंग निर्देशक प्रकाश झा अहि कठिनगर काज कें सफलतापूर्वक निर्वहन कैलनि। भारतीय भाषाक कोनो भी रूपक मंचन बेसी कठिनगर नहि होइत अछि मुदा विलियम शेक्सपीयरक बहुचर्चित नाटक कें मैथिली मे मंचन केनाई प्रकाश झा ओ मैलोरंगक कलाकार लोकनिक लेल जतेक भिरहगर छल ओ सं बेसी हुनका सब लग अहि बातक डर छलैन्हि कि आखिर दर्शक लोकैन्हि अहि बहुचर्चित नाटक कें मैथिली मे कोन तरहें देखता ओ ओकर प्रतिफल केहन हेतैक?
    सत्रक पहिल चरण मे मैलोरंग द्वारा प्रत्येक बरखक भांति अहि बेर दू गोट व्यक्तित्व कें ज्योतिरीश्वर सम्मान ओ रंगकर्मी श्रीकांत मंडल सम्मान सं सम्मानित कैल गेल। वर्ष 2014क ज्योतिरीश्वर सम्मानक लेल छत्रानंद सिंह झा उर्फ बटुक भाई कें एवं रंगकर्मी श्रीकांत मंडल पुरस्कारक लेल आशुतोष यादव अभिज्ञ कें सम्मानित कैल गेलनि। छत्रानंद सिंह झा उर्फ बटुक भाई आकाशवाणी पटना सं नियमित प्रसारित होई वला कार्यक्रम चैपालक संचालकक संग-संग मैथिली मंचक स्थापित उद्घोषक संग-संग वरिष्ठ रंगकर्मी छैथ। डा. ममता ठाकुर द्वारा प्रायोजित ज्योतिरीश्वर सम्मान बटुक भाई कें देल गेलनि त 35 बरख सं कम उम्रक युवा रंगकर्मीक सम्मान आशुतोष अभिज्ञ कें भेटलनि जाहि मे प्रशस्ति पत्रक संग-संग, शाॅल ओ 5 हजार टकाक नकद पुरस्कार आ ऐबा-जेबाक लेल राजधानी ट्रेनक टीकटक संग-संग ठहरवाक व्यवस्था संस्थाक दिस सं रहैत अछि। ओम्हार मैलोरंगक आधिकारिक वेबसाईटक अनावरणक संग-संग प्रसिद्ध नाट्यकार ओ मैलोरंगक अध्यक्ष महेंद्र मलंगिया कनाम सं प्रकाशित पुस्तक ‘महेंद्र मलंगिया-जीवन एवं सृजन’क विमोचन कैल गेल। 
    दोसर चरण मे विश्वक बहुचर्चित नाटक रोमियो-जूलियटक मंचन शुरू भेल आ श्रीराम सेंटर सभागार मे बैसल समस्त बेस रास दर्शक लोकैन्हि नाटकक आनंद उठावैत मंत्र-मुग्ध होइत नजैर एलैथ। हम अहि ठाम रोमियो-जूलियटक कहानी बतेनाई उचित नहि बुझैत छी कारण रेमियो-जूलियट कें कोनो परिचय कें आवश्यकता नहि छैक हां नाटक मे भाग लेनिहार कलाकारक विषय मे विस्तृत जानकारी ओ परिचय देव आवश्यक अछि। नाटकक लेखक विलियम शेक्सपीयर जाहि तरहें अंगरेजिया संस्कृतिकें रूढि़वादी परम्परा पर कुठारघात क जाहि विषय-वस्तुकें समेटने छथि ताहि विषय-वस्तुकें मिथिलाक संस्कृतिमे सहेज क ओकरा आधुनिक रूपमे प्रस्तुत करब बड्ड बेसी साहसक संग सृजनकारी विषय अछि। निश्चितरूपे एहि प्रयोगमे युवा रंग निर्देशक प्रकाश झा सफल रहलाह अछि आ एहि सफल यात्रामे हुनक संग डेगमे-डेग मिलाक’ चलनिहार रंगकर्मी लोकनिक योगदानकें अविस्मरणीय रहल। कलाकार लोकनिक परिचय मुकेश झा (चान/रामेन्द्र/रोमियो), अनिल मिश्रा (जूलीक पिता), सत्या मिश्रा (चकोर/जूली/जूलियट), प्रवीण कश्यप (पंडितजी), संतोष कुमार (राजा बाबू/मसिऔत भाई), अमरजी राय (रामेन्द्रक लंगोटिया मित्र/बालेन्द्र), अमित कुमार (रामेन्द्रक बालसखा/मानेन्द्र), मनोज पाण्डे (राजकुमार प्रताप), रमण कुमार (जग्गा), ज्योति झा (ककना वाली दाई), नीरा झा (जूलियटकें माए), राजीव रंजन झा (पार्श्व स्वर), राजीव मिश्रा (पार्श्व ध्वनि), अजीत मलंगिया (तबला वादन), अखिलेश कुमार (की-बोर्ड), दीपक ठाकुर (पार्श्व संगीत), गोविन्द जी (प्रकाश परिकल्पना) आदिकें योगदान उल्लेखनीय एवं प्रशंसनीय रहल। मिथिला मिरर परिवार कें दिस सं मैलोरंगक निर्देशक प्रकाश एवं हुनकर समस्त टीम कें अहि दुःसाहसिक कार्यक कुशल संपादन व मंचन हेतु कोटि सह बधाई आ नव प्रयोग करवाक शुभकामना सेहो। 
     

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