आंदोलनकारी कें उचित सम्मान दौथ मैथिल समाज

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    दिल्ली-मिथिला मिररः मिथिला राज्यक लेल चालाओल जा रहल आंदोलनक कि पिरणाम हेतैक ई त भविष्यक गर्भ में छुपल अछि मुदा पटना में अनूप कुमार आ मनोज झा द्वारा मैथिली भाषाक सम्मानक लेल कैल गेल अनशनक जाहि तरहें परिणाम नकलि कऽ बाहर आयल ओहिक बाद मैथिल समाज में नव चेतनाक सूत्रपात होयब आवश्यक अछि। पटनाक अनशनक सरकार बहीखाता में कतेक जगह पौलक वा कि नहि ओहो कोनो गंभीर विषय नहि मुदा जाहि तरहें मैथिलीक सम्मानक विषय पर विभिन्न राजनीतिक दलक प्रतिनिधि लोकनि अनशन स्थल तक पहुंचलनि ई प्रशसनयि छल। सोशल मीडिया पर गोबर छत्ता जेना पसरल किछु स्वघोषित मैथिलीक पूरोधा लोकनिक लेल ओ दृश्य हुनकर आंखि में लोंगिया मिरचाईक करूआहट सं कम नहि बुझायल हेतनि। विधानसभाक भीतर आ बाहर जाहि तरहें मिथिला क्षेत्रक प्रतिनिधि लोकनि अपन प्रखर आवाज कें बुलंद केलनि ओहो का़बिले तारीफ छल।
    अनशन स्थल पर लगातार बीजेपीक विधायक गोपाल जी ठाकुर, संजय सरावगी, विनोद नारायण झा, बिहार कांग्रेसक वरिष्ठ नेता, प्रेमचंद्र मिश्र, रालोसपाक नेता, शंकर झा आजाद, बीजेपीक विधायक, मंजू हजारी, राजीव रंजन, अरूण शंकर प्रसाद सहित अन्य-अन्य नेतागणक उपस्थिति सं ई बात स्पष्ट भय गेल कि मिथिला-मैथिलीक जे आंदोलन चलाओल जा रहल अछि जौं ओकरा साकारात्मक दिशा में चलाओल जाय त निश्चित रूपहि ओकर परिणाम दूरगामी आ सार्थक हैत। चूंकि मिथिला मिरर पटनाक अनशन कें बहुत नजदीक सं देखलक आ ओहिक बाद जाहि निष्कर्ष पर पहुंचल ओहि में ई बात साफ झलकैत नजरी आयल कि अनशन पर बैसल अनूप कुमार आ मनोज झाक संग-संग श्याम सुंदर झा आ सुभाष चंद्र राय एक सप्ताह सं बेसी धरि अपन अदम्य साहसक परिचय दैत ओहि ठाम डटल रहलथि मुदा जाहि तरहक सार्थक काजक लेल ई अनशन भेल ओहि में समाज सं एकटा पैघ स्तर पर समर्थनक आवश्यकता छल। जाहि तरहक दुलार अनशनकारी कें भेटवाक चाहि छल कतौ ने कतौ आंदोलनकारी ओहि स्नेह सं वंचित रहलथि ई वास्तव में एकटा दुःखद विषय थिक।
    देशक उन्नतीसम राज्य बनावाक गौरव प्राप्त करैवला ‘तेलंगाना’क गठन में एक हजार सं बेसी लोकक प्राण चलि गेलै, संसद सं सड़क तक जो़रदार प्रदर्शन भेल आ जाहि तरहक प्रतिवद्धता तेलंगाना क्षेत्रक लोक छल ओ संपूर्ण दुनियाक सोझा अछि मुदा अहि सबहक बीच जौं तेलंगाना गठनक सूत्रधारक बात उठत त ओ एक मात्र नाम अछि ‘के. चंद्रशेखर राव’ एहन बात नहि छैक कि मात्र एकेटा चंद्रशेखर रावक योदगाद सं तेलंगानाक गठन भय गेल मुदा संपूर्ण तेलंगाना वासीक लेल एकेटा नेता आ एकेटा अभिनेता छल जेकरा नाम अछि चंद्रशेखर राव। हजारो आंदोलनकारी मुदा रिमोट बस एके गोटेक हाथ में। नहि त ओहि ठाम कोनो चेहराक आवश्यकता छल आ नहि कोनो संगठनक पोस्टर आ कि बैनरक। सबहक मन में एक मात्र संकल्प छल तेलंगानाक गठन आ अंततोगत्वा आंध्र प्रदेशक विभाजन भेल आ तेलंगानाक सपना साकार भेलैक। मुदा ओ तेलंगाना छल आ ई मिथिला अछि जाहि ठाम सब कियो स्वयं में विभूति छथि आ सबहक चेहराक एकटा मोल छनि। जौं चेहरा नहि देखेतनि त लोक में नाम कोना हेतनि आ आजुक युग में सत्य ओहै अछि कि जे देखाईत अछि ओहै बिकैत अछि। कि ई चेहराक प्राथमिकता देनाई आंदोलनक लेल विनाशकारी नहि थिक ?
    इतिहास गवाह अछि कि कोनो आंदोलन तखने सफल भेल जखन ओकर कियो एकेटा कर्णधार ओहि आंदोलन रूपि नावक खेवैया बनि मजधार में चलल। मुदा मैथिल समाज में त बेसी योगी मट्ठ उजार बला बात अछि। सब कियो नेता छथि आ सब अपना आप में स्वयं कें कोनो विद्धान सं कमतर नहि बुझैत छथि आ जे कम बुझवाक प्रयत्न करैत छथि हुनका समाजक लोक बुड़कक श्रेणी में राखि दैत अछि। कि मैथिल समाज अपन अहि चेहराक प्रदर्शनी खत्म करवाक दिस डेग बढ़ा मिथिला-मैथिलीक लेल सार्थक प्रयास करता आ कि चेहरा कें सोशल मीडिया तक सीमित रखवाक तक आंदोलन कें चलाओत इ एकटा यक्ष प्रश्न अछि ? समाज आई ओहि प्रणेता दिस टकटकी लगा देख रहल अछि जे अपन प्रतिवद्धता सं मैथिलजन में किछु नव करवाक जोश भरि देत। समाजक नव पीढि़ अत्यंत उत्सुक अहि मुदा ओ अपना-आप कें जाहि ठाम जोड़ैत अछि ओहि ठाम सं ठकाकय घर दिस आबि जाइत अछि आ ओकरा मोन में बसल आंदोलनक आंगि भुम्हुर हेवा सं पहिने मिझा जाइत अछि।
    मैथिलजनक ई कर्तव्य नहि छलनि कि ओ पटना में मैथिली लेल कैल जा रहल अनशन कें अपन नैतिक आ कि शाररिक समर्थन दैतथि। संस्थाक गठन कोनो पैघ बात नहि, एक जगह आ एक समाज में बहुत रास संस्था भय सकैत छैक मुदा ओहि संस्थाक मूल विचार अलग रहितो माटि-पानि सं जुड़ल विषय पर एक हेवाक आवश्यक छल जाहि ठाम नहि मोछक मोल आ नहि पोस्टर आ बैनरक जरूरत छल। कि मैथिल समाज आब ओतेक संवेदनहीन भेल जा रहल अछि। समाज एकटा अनशकारी कें मरवाक बाट देखवाक इंतजार करवा में विश्वास राखैत अछि ? कि पटना में जौं अनूप कुमार आ मनोज झाक संग एकटा पैध जनमानस रहैत त ओकर परिणाम किछु आओर सामने आबैत मुदा ओहो नहि भेल। कि पटनाक अनशन ओहि स्वघोषित कर्णधार लोकनिक नहि छलनि जे सोशल मीडिया पर अपन उपस्थिति सदिखन देखबैत छथि। कि हुनकर ई काज नहि छलनि कि ओ पटनाक अनशन कें सोशल मीडिया में जमि कय प्रचार करितथि ?
    पटनाक अनशनक परिणाम किछु ने किछु त साकारात्मक जरूर आयल चाहे मिथिलाक स्वघोषित प्रहरि सब ओकरा सार्थक मानौत आ कि नहि मुदा पटनाक अनशनक बाद जे बात मैथिल समाजक लेल सिखक रूप में सामने आयल ओ अछि मैथिलजन अनशन-प्रदर्शनकारीक सम्मान करौथ, ताकि नव डेग बढे़वा में मैथिल पूत लोकनि कें साहसक जागृति हेतनि आ सरकार लग तक ओ बात स्पष्ट रूप सं उठाओल जायत।

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