विश्व प्रसिद्ध चित्रकार एस.सी.सुमन केर एकल प्रस्तुति

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    काठमांडू,मिथिला मिरर-प्रवीण नारायण चौधरीः काठमांडुक सिद्धार्थ आर्ट गैलरीमे पैछला १० दिसम्बरसँ मिथिला-पेन्टिंगकेर जानल-मानल हस्ती श्री एस. सी. सुमन केर अनुपम संग्रह सबहक प्रदर्शनी लागल अछि जे आगामी जनवरी ६, २०१४ तक चलत। एहि प्रदर्शनीक उद्घाटन भारतीय राजदूत श्री रंजित रे द्वारा कैल गेल छल। “मिथिला कस्मोस सर्कुम्बुलेटिंग ट्री अफ लाइफ” थीमपर आधारित एहि प्रदर्शनीमे कलाकारिता मिथिलाक मानव जीवनशैलीमे पर्यावरण संग समीपताकेँ दरसाओल गेल अछि। वर्तमान ग्लोबल वार्मिंग केर खतरासँ जतय संसार चिन्तित अछि ताहिठाम सुमनजीक चित्रकला मिथिलाक जीवनशैलीमे देल गेल पर्यावरणकेर महत्त्वकेँ अपन चित्रक मार्फतसँ संसारक सोझाँ राखबाक भरपूर प्रयास केने छथि। कर्मकाण्ड हो, देव-पितर कर्म हो, व्यवहारिक जीवन हो, गृहसज्जा हो, ओढन-पहिरन हो, जीवनक कोनो पहलूमे मिथिला मानस सदैव गाछ-वृक्ष-फूल-पत्ती-जल-हवा आदि संग भीजल रहैत अछि। मिथिला चित्रकलामे एहि समस्त जीवनचर्याकेँ कलाकारितापूर्ण ढंगसँ कैनवासपर उतारल गेल अछि। आम-मौह बियाह, बट-सावित्रीक पूजा, बर-पीपर समान पैघ वृक्षसँ लैत छोट दुइभो केर ओतबी महत्त्व देनाय, चर-चाँचरक गुम्मा फूल हो वा बगीचाक गुलाब, तीरा-गेन्दा-लंकेसर-अरहूल-कनैल-कचनार आ कतेको रंगक फूल, देवताक पसिनसँ फूलक अर्पण करबाक महत्ता – विष्णु लेल पियर, सरस्वती लेल उज्जर, शिव लेल धतुराक फूल, किनको कमलक फूल, किनको मलकोका, पत्तेमे केराक पत्ता, तुलसी, बेलपात, आकक पात, मैनाक पात, जीवनक विभिन्न समयमे विभिन्न रंगक महत्त्व – कलाकार एहि सबकेँ अगल-बगल रहैत गरिमामय चित्र सब प्रदर्शनीमे प्रस्तुत केलैन अछि।

    पहिने कहल जा चुकल अछि जे एहि बेरुक प्रदर्शनीक उद्घाटन जेना भारतीय राजदूत केलैन – तहिना नेपालमे विश्वक विभिन्न देशक राजदूतावासक विशेष रुचिपूर्ण सहभागिता नित्य देखय मे आबि रहल अछि। विद्वान्, गणमान्य, महान व्यक्तित्व सब एहि प्रदर्शनीमे विशेष रुचिक संग सहभागी बनि रहल छथि। कतेको महत्त्वपूर्ण लोक जेना डा. रामावतार यादव, रामदयाल राकेश, धीरेन्द्र प्रेमर्षि, अभि सुवेदी लगायत विभिन्न क्षेत्रमे प्रसिद्धि पौनिहार लोकनि एहि मिथिला पेन्टिंग प्रदर्शनीक प्रत्यक्ष गवाह बनि रहल छथि। तहिना कला-अध्ययनमे जुडल युवा पीढीक लोक सब विशाल संख्यामे प्रदर्शनी केन्द्र पहुँचि रहल छथि। साहित्यकार, स्तम्भकार, पत्रकार, कलाकार सहित आमजनक लेल खुलल ई प्रदर्शनी नेपालक राजधानी काठमान्डुमे वर्तमान समयक मुख्य आकर्षण केन्द्र बनल अछि।

    लगभग एक सौ सँ ऊपर महत्त्वपूर्ण पेन्टिंग सब प्रदर्शनीमे लगाओल गेल छल जाहिमे सँ १५ टा महत्त्वपूर्ण पेन्टिंगकेर बिक्रय कैल जा चुकल अछि। हाल धरि लगभग ५ लाख रुपया मूल्यक पेन्टिंग बिक्री कैल जा सकल अछि। पेन्टिंगकेर मूल्य रु. ३० हजार सँ ६० हजार धरिक छैक। सबसँ कीमती एक पेन्टिंग जाहिमे संपूर्ण सप्तशती-अंशकेर समाहित कैल गेल छलैक आ दूर्गा देवीरूपी शक्ति जिनक आराधना मिथिलामे घरे-घरे कैल जाइछ तिनकर स्वरूपकेँ उकेरल गेल छल सेहो बिक्री कैल गेल। क्रेतावर्ग आनबेर तँ अन्तर्राष्ट्रीय जगतसँ बेसी होइत छल, मुदा एहि बेरुक प्रदर्शनीमे गैर-मैथिल नेपालीक संख्या एकदम उत्साहजनक अछि। ओतहि मैथिलक सहभागिता क्रेतारूपमे नगण्य अछि जे चिन्ताक विषय बुझाइछ। कलाकारक कलाकारिताक महत्त्वमे भविष्य तक सहेजबाक दृष्टिक महत्त्व छैक। यदि स्वयं मैथिल एहिसँ दूर रहैत छथि तऽ एकरा संरक्षित रखबामे आगामी पीढी कोना सक्षम होयत, ई चिन्ताक विषय एना बनि जाइछ। सुमनजी आह्वान करैत छथि जे मैथिल जरुर बेसी संख्यामे आबैथ आ संगमे बाल-बालिकाकेँ जरुर आनैथ जे मिथिला पेन्टिंगकेर गरिमा ओ मूल्यकेँ हृदयसँ बुझत, बुझबाक प्रयास करत आ एहि परंपराकेँ आगू तक लऽ जायत। ओकरा सबकेँ गौरव हेतैक, संस्कृति सहेजबाक लेल ई जरुरी छैक। संकलन योग्य पेन्टिंग ओहो सब जरुर किनैथ।

    पेन्टिंगकेर वर्तमान व्यवसायीकरणक अवस्थापर चित्रकार सुमन बहुत प्रसन्न देखा रहल छथि। कहैत छथि – “उत्कृष्ट काज केलापर हाथोहाथ खरीदार भेटत।” मिथिला पेन्टिंगमे बितैत समयक संग नव प्रयोग आदि पर सेहो प्रकाश दैत कहैत छथि – “प्राकृतिक रंग – आधुनिक सिन्थेटिक रंगक संग एहि बेर खनिज रंगक प्रयोग केने छी। खनिज रंग जाहिमे स्वर्ण-रंगक बेसी प्रयोग छैक से लोककेँ बेसी आकृष्ट कय रहल छैक। ई प्रयोग संभवत: पहिले बेर कैल गेल अछि आ से बड विशाल स्तरपर सफल भेल अछि।” भारत सहित विदेशमे मिथिला पेन्टिंगकेर प्रयोग आब टेक्सटाइल प्रिन्टेड साडी, जाजिम, छाता, आदिमे आ होजियरी तैयारी पोशाक सबमे कंप्युटर डिजाइनिंग द्वारा एम्ब्राइडरी मार्फत सेहो नीक बाजार अमेरिका व युरोप आदि मे लेबय लागल अछि। मिथिलाकेँ आइ विश्वस्तरपर चिन्हाबयमे मिथिला पेन्टिंग पहिल स्थानमे देखा रहल अछि।

    ई कार्यक्रम जनवरीक प्रथम सप्ताहतक चलबाक अछि। नित्य कोनो न कोनो जुडल कार्यक्रम सब सेहो राखल जा रहल अछि। एहि क्रममे २२ तारीख एक सांगीतिक समारोह सेहो राखल गेल अछि। एहि सांगीतिक कार्यक्रममे आभास लाभ, गुरुदेव कामत, रुपा झा, धीरेन्द्र प्रेमर्षि, मीणा कर्ण समान दिग्गज गायक सब उपस्थित रहता। अपराह्न २ बजेसँ ४ बजे धरि तक ई सांगीतिक समारोह मिथिला पेन्टिंगकेर प्रदर्शनीक उत्कर्ष संग मैथिली व मिथिलाक ब्लेन्ड प्रदर्शनमे सहभागी दर्शक सबहक सोझा रखता। तहिना कविता वाचन करबाक सेहो कार्यक्रम राखल गेल अछि। कविता वाचन लेल मैथिलीक सुप्रसिद्ध कवि, नाटककार आ प्रज्ञा प्रतिष्ठान – नेपालक सदस्य श्री रमेश रंजन, वीरेन्द्र झा विह्वल सहित बहुते रास कविकेर सहभागिताक गुंजाइश अछि। मिथिला संस्कृतिक एक मुख्य अंग मिथिला पेन्टिंग केर एहि प्रदर्शनीसँ नेपाल सहित विश्वक हरेक कोणमे मिथिलाक सनेश पहुँचि रहल अछि, ई एक शुभ संकेत थीक।

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