नागदह पोखड़िक उद्भव आ वर्तमान

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    दिल्ली,मिथिला मिरर-संजय झाः जतवे पुरान अछि नागदह गाम ओतवे पुरान अछि नागदहक पोखड़ि. नागदह आ बलाइन एके पंचायत में पड़ैत अछि .हालाँकि स्वर्गीय डॉ० सुभद्रा झाक लिखल एक गोट पोथीक संदर्भानुसार बलाइन गाँओक प्राचीन नाम छलैक ‘बएनागढ़’ तथा तकर सटल नागदहक रेवेन्यू नाम  थिकैक ‘मालगढ़’. नागदहक पोखड़िक सम्बन्ध में जे किछु बुजुर्ग लोकनि सँ  ज्ञात अछि ओ प्रायः एही तरहे अछि:-

    एही गाँव में कियो दू वा तीन भैयारी रहथि. जखन हुनका लोकनिकेँ आपस में यथा – जात के बंटवारा  होमय लागल त दू वा तीन ठाम बाँटल जाय त स्वतः तीन वा चारि ठाम भ जायल करैक. ई क्रम प्रायः कतेको बेर भेल. गामक लोककेँ बड़ा आश्चर्य लगलन्हि जे भाग / कुड़ी जखन दू वा तीन ठाम लगैत अछि त एक भाग स्वतः कियाक बढ़ी जाइत अछि.तखन एकगोट विद्वान -वुजुर्ग हाथ जोड़ी निहोरा केलाह जे यदि एही में किनको भाग अछि जे अदृश्य छि त कृपाक’ अपन स्थान पर आबि वा प्रकट होय. ई कहला उपरान्त जे भाग बढ़ी जायल  करैक ओहि भाग पर फुफकार मारैत नाग सांप साक्षात् विराजमान भय बैस गेलाह.

    ओहिराईत किनको स्वप्न भेलनि जे हमर भागक भूमि पर पोखड़ि होयबाक चाहि. तैं ओही भागानुकुल पोखड़ि अछि, मिथिला में सुनैत छि जे कतेको पोखड़ि दैत्यक खूनल अछि एकरो सम्बन्ध में कियो – कियो बजैत छथि परन्तु स्पष्ट नहि. ई पोखड़ि मिथिलाक कतेको विशाल पोखड़ि में सँ एक अछि. करीब २० एकड़ जकर खाता नम्बर ३७७ आ खेसरा नम्बर ९९३ ई कहिया केना पंजीकृत भेल से त’ सर्वे कार्यालय सँ पता कराय पड़त. ई बात कोन समय के अछि से एखन धरी स्पष्ट रूपे ज्ञात नहि. ओना लोकानुकूल एही घटना के बाद एही गामक नाम नागदह पड़ल. एही मान्यता के आधार मानैत जे ई पूर्ण रूपे नागडीह अछि. वर्तमान में  नागदह अछि अर्थात नागक डीह. इ बात सत्य अछि जे एही गाम में नागक संख्या बहुत छल आ अछि हम अपने साक्षात् कतेको दिन नागकेँ जोड़ खेलाइत देखने छी. जेना स्वर्गीय डॉ० सुभद्रा झा अपन एक गोट पुस्तक में लिखने छथि ताहि अनुकूल नागदह नाम सँ पहिने कदाचिद एही गामक नाम मालगढ़ छल. तैं ई कहबा में कनमो मात्र अतिश्योक्ति नहि होयबाक चाही, जे जहियासँ गामक नाम नागदह पड़ल ताहि समयसँ ई पोखड़ी उद्भव अछि. कदाचिद कहीं एहन नै होई जे नागदह गामक उम्र ई पोखड़ी संग जुड़ल हो. एक महातिचारक अन्त भेला पर शुद्धिक समय विकराल महा अकाल पड़ल छल. सौराठ सभामें आगत ब्राम्हण लोकनकिकें ग्रासक कोनोटा व्यवस्था नहि करबाक परिस्थितिमें महाराज माधवसिंह सदिच्छाक अनुसार प्राप्त स्मरणीय मोदी झा समस्त सभैताक भोजनक व्यवस्था कएल. तथा हुनके इच्छानुसार ओहि साल सभा सौराठ में नहि लगाए नागदहमे पोखड़िक पुवरीआ भीड़ पर लगाओल गेल,इ बात हमरा स्वर्गीय डॉ सुभद्रा झा कहने छलथि.

    नागदहक पोखड़ी ओहि परोपट्टा में सबसँ विशाल पोखड़ि अछि. सुनैत छी, एही पोखड़ि सँ पैघ ‘बभनदई’ बासोपट्टीक पोखड़ि अछि. नगदहक पोखड़ि के करीब २० वर्ष पहिने चारु कात भीड़ छल,परन्तु आजुक समय में प्रायः चारु कात घर आँगन अछि आ विस्तृत भेल जा रहल अछि. एही पोखड़िक जलक स्रोत दू टा थिक, एक त प्राकृतिक रूपे वर्षा आ दोसर कमला सँ निकलल नहर. ओहि में आयल बाढ़ि सँ नहरक माध्यम सँ एही पोखड़िक जलाशय उम-डाम भ जाईत अछि.  तदोपरांत बाढ़िक खतरा नागदह पर नहि पड़ैत छैक,गामक आवासीय भागक भूमि उँचस्थ छैक. एकटा समय छल जखन पोखड़िक जलाशय कम भ’ जाइत छल , गामक गरीब वर्ग लोकनि थोड़ेक -थोड़ेक  पोखरिक जगह छेक ओहि में जीविकाक लेल मडुआ आ समयानुसारे किछु -किछु उपजाबैत छलाह. बलाइनक मलाह लोकनिकें लेल ई पोखड़ि जीविकोपार्जनक प्रमुख माध्यम छलनि. पोखड़ि देखबा में कोनो विशाल महानदीसन बुझना जाइत छल. सालोभरी मलाह लोकनि जाल आ महाजालसँ पोखड़ि सजाऔने रहैत छलाह.कखनो मलेडिया साफ अभियान त कखनो माँछ मारल जयबाक इंतजाम.

    भरिदिन  गामक बूढ़-बुजुर्ग,युवा, बच्चा पोखड़ि में नहाइत आ चुभकैत रहैत छलाह. माल – जाल सेहो पोखरिक शोभा बढ़ाबईत रहैत छल. आइयो धरि गामक विवाह,उपनयन,मुंडन आ शुभकृत्य पोखड़िसँ  जुड़ल कर्म एही पोखड़ि सँ होइत अछि.  कदाचिद  नागदह पोखड़िक उद्भव सँ एखन धरि गामक लोककेँ सम्पूर्ण पोखड़ि सँ  सम्बंधित कार्य एही पोखरी सँ पूर्ण होइत आएल अछि. इ पोखड़ि नागदह लेल सदा शुभ आ शुभाशीष दैत रहैत छथि. ग्राम देवता, स्थान देवता आ नाग देवता सदा अपन एही ग्रामीण पर स्नेह बनेने रहैत छथि.  एही पोखरिक दक्षिण-पश्चिम कोन में भव्य नागनाथ महादेवक मन्दिर सेहो स्थापित अछि. जकर विधिवत स्थापना १९९८ में भेल,यदपि शिवलिंग आ स्थान बहुत पहिने सँ ओहिठाम छल.

    पोखड़िक बर्तमान हालात कहबा सुनबा योग्य नहि अछि. जाहि पोखड़िक देख – भाल कतेको सौ -साल सँ नहि भेल हो तकर हाल कि कहल जा सकैछ ? ई त मात्र सोचलापरान्त मानसिक पटल पर आवीगेल होयत. कहियो कोनो सरकार एही पोखड़िकें जीर्णोद्धारक वास्ते डेग नहि उठेलथि. एहना स्थितिमें पोखड़िक गहराई कम भेनाइ त स्वाभाविके थिक. पोखड़ि प्रायः अपन रकवा में ३० % (तीस भाग ) भरि चुकल अछि,आ कतेक शीघ्र भरि जाएत से कहल नहि जा सकैछ, कारन अतिक्रमण बहुत जोर शोर सँ भ’ रहल अछि. जे लोक जाहि दिशा में  छथि ओ ओहि भाग पोखड़ि भरनाई शुरू क’ चुकल छथि, इ कार्य युद्धस्तर सँ भ’ रहल अछि. कारन इ पोखरिक गिनती  किनको व्यक्तिगत नहि अपितु सरकारी में होइत अछि, तै रोकत के, बाजत के ?  इ थिक वर्तमान में नागदहक पोखड़िक स्थिति.

    मिथिला क्षेत्र में बिहार सरकारक उपेक्षा सतत रहल अछि, परन्तु एही दिशा में मिथिलाक विद्वतजनक आँखि प्रायः एखनो धरी बन्न अछि. जौं अपन आँखि नहि फूजल रहत त दोसर सँ कि आस ? मिथिलावासी लोकनि सँ आग्रह करैत छी जे अपन धरोहर के बचाबक बास्ते हम सब आगा बढ़ि, नहि त’ ओ दिन दूर नहि जखन हमर सभक आदि गुरु बाबा विद्यापतिक लिखित पंक्ति ‘ पग पग पोखड़ि पान मखान ,सरस बोल मुस्की मुस्कान’ भविष्य में झूठ सावित भ’ जाएत. कारन जखन पोखड़ि ए नहि त’ मखान कतए सँ ?

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